Nagpur News: नागपुर की एफडीए की नई बिल्डिंग में अफसरों की मौज, लैब गायब - News Summed Up

Nagpur News: नागपुर की एफडीए की नई बिल्डिंग में अफसरों की मौज, लैब गायब


Nagpur News नये साल में अन्न व औषधि विभाग को एक नई इमारत कार्यालय के लिए मिली है, लेकिन यह केवल अधिकारियों के सुविधा के लिए दिख रही है, क्योंकि अभी तक इसमें लैब नहीं शुरू किया है। साथ ही गोदाम का भी सही तरह से उपयोग नहीं किया जा रहा है। परिणामस्वरूप महीनों से प्रलंबित सैंपल रिपोर्ट के हाल वैसे ही हैं। इधर पुराने एफडीए कार्यालय में जब्त सामान की चूहे दावत उड़ा रहे हैं।सीएम ने किया था उद्घाटन : इस साल अधिवेशन के दौरान मुख्यमंत्री के हाथों सिविल लाइंस में एफडीए (अन्न व औषधि विभाग) के लिए नई इमारत का उद्घाटन किया गया है। इस नए भवन के निर्माण से विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को अब एक सुविधाजनक, व्यवस्थित और बेहतर कार्यस्थल मिला है। उद्घाटन के कुछ ही दिनों में विभाग का कार्यालय वर्तमान प्रशासकीय इमारत क्रमांक 2 से इस नई इमारत में शिफ्ट कर दिया है। पुरानी इमारत में गोदाम और लैब की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण कर्मचारियों को कई असुविधाओं का सामना करना पड़ता था।नई इमारत में कार्यालय स्थानांतरण से इन दिक्कतों का अंत हो जाएगा और कर्मचारी अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेंगे, यह अनुमान लगाया जा रहा था। लेकिन ऐसा नहीं होते दिख रहा है। क्योकि इस सकारात्मक कदम के बावजूद एक बड़ी समस्या अभी भी अनसुलझी बनी हुई है। वह है खाद्य पदार्थों और औषधियों के सैंपल जांच में हो रही भारी लेटलतीफी। नई इमारत में अभी लैब की स्थापना नहीं हुई है और इसे शुरू होने में काफी समय लगने वाला है। इसलिए वर्तमान में सैंपलों को जांच के लिए अन्य स्थानों पर ही भेजना पड़ेगा, जैसा कि पहले से होता आ रहा है। मुख्य रूप से संभाजी नगर और मुंबई की सरकारी लैबों में ये सैंपल भेजे जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में सामान्यतः 3 महीने तक का समय लग जाता है। रिपोर्ट आने में इतनी देरी होने से विभाग का समग्र कार्य प्रभावित होता है।समय पर कार्रवाई नहीं हो पाती : यह देरी जन स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती है। रेस्तरां से लेकर सड़क किनारे की छोटी-छोटी टपरियों तक जहां भी खाद्य पदार्थ बेचे जाते हैं, उनकी गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करना अन्न व औषधि विभाग का प्रमुख दायित्व है। सामान्य नागरिकों का स्वास्थ्य इससे सीधे जुड़ा होता है। किसी शिकायत या संदेह की स्थिति में विभाग तुरंत सैंपल एकत्र करता है और जांच के लिए भेजता है, लेकिन रिपोर्ट में 3 महीने की देरी होने से समस्या का समाधान समय पर नहीं हो पाता। इससे उपभोक्ताओं को खतरा बना रहता है और दोषी विक्रेताओं पर त्वरित कार्रवाई भी संभव नहीं हो पाती। पिछले रिकॉर्ड बताते हैं कि संसाधनों की कमी और मानवबल की अपर्याप्तता के कारण जांच रिपोर्ट में 3 महीने तक की देरी आम बात रही है। नई इमारत के उद्घाटन और कार्यालय शिफ्ट होने के बाद भी लैब न होने से यह सिलसिला जारी है। जिससे यह इमारत केवल अधिकारियों के सुविधा के लिए ही बनते दिखाई दे रही है। हैरानी की बात यह भी है, कि इमारत में गोदाम है, लेकिन इसके बाद भी पूराने कार्यालय परिसर में रखे खाद्य सामग्री वही पर रखी गई है, जिसका चूहे दावत उड़ा रहे हैं।


Source: Dainik Bhaskar February 26, 2026 13:17 UTC



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