Nagpur News उपराजधानी की पहचान मानी जाने वाली नाग नदी आज बदहाली की मिसाल बन चुकी है। नदी उद्धार के लिए सरकार ने 1927 करोड़ की निधि मंजूर की है। इसके बावजूद नाग नदी परियोजना का कार्य वर्षों से अटका पड़ा है। नदी को अतिक्रमण ने घेर रखा है। इसके कई हिस्सों में फ्लाईओवर के पिलरों का निर्माण किया चुका है। निर्माण कार्य की मिट्टी नदी में डाली जा रही है। इससे नदी का प्रवाह संकरा हो गया है। मनपा द्वारा बनाए गए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी पूरी तरह क्षतिगस्त हो चुके हैं। जिम्मेदार विभागों के अधिकारी खुलकर बोलने से बच रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि करोड़ों की मंजूर निधि के बावजूद नाग नदी का उद्धार आखिर कब होगा।नाग और पीली नदी का संगम : शहर के आखिरी छोर भरतवाड़ा में नाग और पीली नदी का संगम होता है। करीब 20 किमी का सफर तय कर नाग नदी यहां पीली नदी से मिलती है। संगम स्थल तक पहुंचने से पहले ही नाग नदी का पानी पीली नदी की तुलना में अधिक गंदा और बदबूदार नजर आता है। यह अंतर इसलिए अहम है, क्योंकि पीली नदी पहले से ही पुराने औद्योगिक क्षेत्रों और घनी बस्तियों से गुजरते हुए नाले जैसी बन चुकी है।2022 में मिली थी मंजूरी : नाग नदी प्रदूषण निर्मूलन व पुनर्जीवन परियोजना को वर्ष 2022 में मंजूरी मिली थी। 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका भूमिपूजन किया था। कुल 1927 करोड़ रुपए की इस परियोजना में केंद्र सरकार की 60 प्रतिशत हिस्सेदारी (1115 करोड़), राज्य सरकार की 25 फीसदी (507 करोड़) और मनपा की 15 फीसदी (305 करोड़) हिस्सेदारी तय है। केंद्र ने 2024-25 में 295.62 करोड़ और 2025-26 में 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। जानकारी के अनुसार घोषित निधि अब तक पूरी तरह आवंटित नहीं हुई है। इससे परियोजना की शुरुआत अटकी हुई है।उद्धार नहीं, अतिक्रमण जरूर बढ़ा : नाग नदी का पुनरुद्धार भले ही नहीं हुआ हो, पर अतिक्रमण जरूर बढ़ा है। इंदोरा से दिघोरी फ्लाईओवर परियोजना के तहत अशोक चौक के पास नदी के भीतर ही करीब 6 पिलर खड़े कर दिए गए हैं। इनमें से कुछ पिलर पानी के बहाव वाली आर्च के बीच में बने हैं। आसपास कचरे का ढेर जमा है। वाठोड़ा की ओर पारडी फ्लाईओवर के दो पिलर भी नदी के बीच में बनाए गए हैं। भविष्य में जलस्तर बढ़ने पर ये पिलर पानी के प्रवाह में बाधा बन सकते हैं, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है। नदी किनारे बाउंड्री वॉल निर्माण के लिए डाला गया मलबा भी प्रवाह को प्रभावित कर रहा है। इससे नदी की चौड़ाई और गहराई दोनों कम हो रही हैं।जर्जर एसटीपी : नदी में गिरते गंदे पानी को रोकने के लिए बनाए गए एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) भी बदहाल स्थिति में हैं। डागा ले-आउट स्थित प्लांट की हालत चिंताजनक है। करोड़ों रुपए की लागत से बना यह प्लांट कुछ ही वर्षों में जर्जर हो गया। रखरखाव का अभाव होने से कई मशीनें बंद हैं। प्लांट का सूचना बोर्ड तक टूटा हुआ है। शंकर नगर, रामदासपेठ, नंदनवन, वाठोड़ा और पारडी जैसे इलाकों से निकलने वाला गंदा पानी पाइप लाइन के जरिए सीधे नदी में गिर रहा है। पहले दावा किया गया था कि सीवेज को नदी में जाने से रोका जाएगा, लेकिन हालात कागजों तक सीमित हैं।मनपा पूरी तरह प्रतिबद्ध : नाग नदी के उद्धार के लिए हम अलग-अलग नीतियों पर काम कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सौंदर्यीकरण नहीं है, बल्कि नदी को प्रदूषण मुक्त बनाना है। नाग नदी को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए मनपा पूरी तरह प्रतिबद्ध है। -नीता ठाकरे, महापौरजल्द शुरू करेंगे कामकाज : हम नाग नदी की सफाई के लिए प्रयासरत हैं। नाग नदी का काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है। जल्द ही कामकाज की शुरुआत करेंगे। श्वेता बनर्जी, अधीक्षक अभियंता, मनपासिर्फ घोषणाओं से काम नहीं चलेगा : नाग नदी को लेकर कागजों पर बड़ी-बड़ी योजनाएं बन रही हैं। करोड़ों रुपए मंजूर हो चुके हैं। जमीन पर हालत अब भी चिंताजनक हैं। अगर सच में नदी को बचाना है, तो सिर्फ घोषणाओं से काम नहीं चलेगा, लगातार निगरानी और ईमानदारी से काम करना होगा। - रचना सिंह, पर्यावरण प्रेमी
Source: Dainik Bhaskar February 19, 2026 19:30 UTC