Nagpur News जिले की सभी एक्सप्लोसिव और केमिकल कंपनियों को 10 दिन में जिलाधीश कार्यालय में अपना-अपना आपदा प्रबंधन प्लान प्रस्तुत करना होग। एक्सप्लोसिव और केमिकल कंपनियों का सेफ्टी के लिहाज़ से इंस्पेक्शन किया जाएगा। जिलाधीश डॉ. विपिन इटनकर ने निर्देश दिया कि डिश, पेसाे, पुलिस और राजस्व विभाग मिलकर अगले एक महीने में एक्सप्लोसिव कंपनियों का इंस्पेक्शन करके डिज़ास्टर मैनेजमेंट और सेफ्टी के लिहाज़ से ज़रूरी उपाय किए जाएं।प्रबंधन उपायों की समीक्षा : याद रहे जिले की एसबीएल एनर्जी लिमिटेड कंपनी में हुए धमाके में अब तक 22 लोगों की मौत हुई है। अभी भी कई श्रमिक जिंदगी आैर मौत से लड़ रहे है। जिलाधीश ने सभी एक्स्प्लोसिव कंपनियों को 10 दिन में डिज़ास्टर मैनेजमेंट और सेफ्टी से संबंधित प्रेजेंटेशन देने के निर्देश दिए। उन्होंने कंपनियों को उन्नत व अत्याधुनिक इमरजेंसी प्लान तैयार करने को कहा। उद्योगों में आपदा प्रबंधन उपायों की भी समीक्षा की गई। डा. इटनकर ने निरीक्षण के दौरान कंपनियों में पाई गई कमियों को तुरंत ठीक करने के निर्देश दिए। बैठक में अतिरिक्त जिलाधीश प्रवीण महिरे, निवासी उप जिलाधीश अनूप खांडे, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी अंकुश गावंडे, उप-विभागीय अधिकारी, पेसो, डिश श्रम आयुक्तालय आैर औद्योगिक कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।औद्योगिक सुरक्षा अहम : पेसो व डिश के अधिकारियों ने औद्योगिक सुरक्षा पर एक प्रेजेंटेशन दिया। बैठक में एसओपी, कानूनों में संशोधन, नए नियमों पर चर्चा की गई। जिला पुलिस अधीक्षक हर्ष पोद्दार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संवाद किया।नियम में होगा संशोधन : बैठक में इस बात का खुलासा हुआ कि पेसो व डिश के अधिकारी तभी बारुद कंपनी में निरीक्षण के लिए जा सकते हैं, जब उनका रोटेशन के हिसाब से नंबर आता है। कंपनियों की संख्या को देखते हुए एक-एक कंपनी का नंबर आने में 11-12 महीने लग जाते हैं। नियम में संशोधन करके इस अवधि को कम किया जाएगा। सरप्राइज विजट का प्रावधान नहीं है। अब इस दिशा में भी विचार होगा। इंस्पेक्टर राज खत्म करने व उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह किया गया था, लेकिन इसके दुष्परिणाम सामने आने से अब रोटेशन की अवधि कम करने पर चर्चा हुई।दो एजेंसी सीसीटीवी पर एकमत नहीं : पेसो व डिश की नियमावली पर नजर डाले तो एक एजेंसी एक्सप्लोसिव कंपनी में सीसीटीवी लगाने की अनुमति देती है, वहीं दूसरी एजेंसी इनकार करती है। सीसीटीवी कैमरों पर उड़नेवाली धूल व गर्मी के कारण इसमें आग लगने या फूटने का डर बताया गया है। अब इसमें भी संशोधन हो सकता है। फायर प्रूफ सीसीटीवी कैमरे लगाने पर बैठक में विचार हुआ।प्रशिक्षित श्रमिक ही काम करेगा : बैठक में इस बात पर एकमत हुआ कि प्रशिक्षित श्रमिक ही काम कर सकेगा। जरा सी लापरवाही से होनेवाले बड़े हादसे को रोकने के लिए अब केवल कंपनी में दिए जानेवाले 20-30 दिन के प्रशिक्षण से काम नहीं चलेगा।
Source: Dainik Bhaskar March 10, 2026 09:56 UTC