Narco & Polygraph Test for Four Youths - News Summed Up

Narco & Polygraph Test for Four Youths


पटना में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पास एक छात्रा की आठवीं मंजिल से गिरकर संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में पुलिस अब चार युवकों का नार्कोटिक और पॉलीग्राफ टेस्ट कराएगी। इसके लिए पुलिस ने कोर्ट में अर्जी दायर की है।. यह मामला छात्रा की हत्या या आत्महत्या से जुड़ा है। इससे पहले, पुलिस ने 8वीं मंजिल से डमी पुतला गिराकर क्राइम सीन को रीक्रिएट किया था ताकि घटना की परिस्थितियों को समझा जा सके।जिन चार युवकों का नार्कोटिक और पॉलीग्राफ टेस्ट किया जाना है, उनमें अपार्टमेंट का एक गार्ड और तीन कारपेंटर शामिल हैं। न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद ही पुलिस इन चारों का टेस्ट कराने की तैयारी करेगी।सिटी एसपी पश्चिम भानु प्रताप सिंह ने बताया था कि पुलिस छात्रा की मौत की जांच सभी पहलुओं से करना चाहती है, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने बताया कि डमी पुतले के माध्यम से क्राइम सीन रीक्रिएट करने के बाद अब इन चारों युवकों का टेस्ट कराया जाएगा।नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट क्या हैनार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट क्या हैं, इस बारे में महावीर कैंसर संस्थान के ईएनटी विभाग के सर्जरी प्रभारी डॉ. कुणाल कुमार ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नार्को टेस्ट को नार्को एनालिसिस टेस्ट भी कहते हैं। यह टेस्ट सबसे पहले 1922 में पश्चिमी देशों में शुरू किया गया था।डॉ. कुणाल ने बताया कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान युद्धबंदियों से सच उगलवाने के लिए इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता था। इस टेस्ट में व्यक्ति को दवा के माध्यम से सोचने-समझने की शक्ति को कम कर दिया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि इन दवाओं के कई साइड इफेक्ट भी होते हैं।इस टेस्ट में दवा के माध्यम से किसी भी व्यक्ति को अर्ध चेतन अवस्था में लाया जाता है और फिर उससे तरह-तरह के सवाल पूछे जाते हैं या फिर उससे कुछ क्राइम सीन का पता लगाया जाता है। उन्होंने बताया कि यह आपराधिक जांच के लिए किया जाता है।यह टेस्ट हर किसी पर नहीं किया जा सकता। इस टेस्ट में कई विभाग के डॉक्टर होते हैं, जिनकी देखरेख में यह टेस्ट संपन्न होता है। इसमें डॉक्टर, प्रशासन और फोरेंसिक विभाग के भी एक्सपर्ट को शामिल किया जाता है।उन्होंने बताया कि पॉलीग्राफ टेस्ट झूठ पकड़ने की एक मशीन होती है और इसके माध्यम से शरीर की प्रतिक्रिया की जांच की जाती है। यह टेस्ट पुलिस को किसी भी मामले के अनुसंधान में सहायता प्राप्त कराती है। यह टेस्ट बिहार के कई सरकारी बड़े अस्पतालों में संभव है।


Source: Dainik Bhaskar February 19, 2026 14:04 UTC



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