दो दशक तक बिहार पर राज करने वाले ‘सुशासन बाबू’ अब दिल्ली की राह पकड़ चुके हैं, जबकि पटना में नया मुख्यमंत्री चुनने का काउंटडाउन शुरू हो चुका है।. आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा की शपथ ली। इसके साथ ही नागमणि, उपेंद्र कुशवाहा, सुशील कुमार मोदी के बाद नीतीश कुमार चौथे नेता हो जाएंगे, जो चारों सदनों के सदस्य रहे हों।राज्यसभा के नए समीकरण के बाद बिहार कोटे से राजपूत साफ और भूमिहार हाफ हो जाएंगे। जबकि, OBC की संख्या बढ़ जाएगी।एक खास बात और है कि नीतीश कुमार ने अकेले शपथ ली है। राजपूतों का गायब होना, OBC का उभार और नीतीश की एकल शपथ-ये तीनों संकेत एक साथ बता रहे हैं कि बिहार की राजनीति अब जाति, गठबंधन और व्यक्तिगत विरासत के नए समीकरण लिख रही है।भास्कर की खास रिपोर्ट में आज उसी तीनों की कहानी...सभापति के चैंबर में नीतीश ने अकेले शपथ लीबिहार के CM नीतीश कुमार आज राज्यसभा में सांसद पद की शपथ ली। जबकि, उनके साथ निर्वाचित हुए BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, JDU के रामनाथ ठाकुर, RLM सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा और BJP नेता शिवेश राम 16 अप्रैल से शुरू हो रहे राज्यसभा के विशेष सत्र में शपथ लेंगे।BJP सूत्रों के मुताबिक, पार्टी चाहती है कि बिहार में 15 अप्रैल तक नई सरकार बन जाए। इसलिए नीतीश कुमार को अकेले शपथ दिलाई जा रही है।दरअसल, 14 अप्रैल को खरमास समाप्त हो रहा है। इसके बाद 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र प्रस्तावित है। ऐसे में 15 अप्रैल को नई सरकार बनने का सही समय है। विशेष सत्र में संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण बिल) पेश किया जाना है तो पार्टी के सभी बड़े नेता वहां मौजूद रहेंगे।सूत्रों की मानें तो 10 अप्रैल को नीतीश कुमार राज्यसभा का शपथ लेने के बाद 11 अप्रैल को बिहार लौटेंगे। 12-13 अप्रैल के बीच NDA के सभी घटक दल अपने-अपने नेता का चयन करेंगे और 14 अप्रैल को NDA विधायक दल के नेता का ऐलान होगा। इसके बाद CM नीतीश कुमार राज्यपाल को इस्तीफा सौंपेंगे और 15 अप्रैल को नई सरकार का गठन संभव हो सकता है।राजपूत साफ, भूमिहार हाफ, NDA के 60% सांसद OBCराज्यसभा के नए समीकरण को देखें तो बिहार कोटे की राज्यसभा के 16 सांसदों में सबसे ज्यादा पिछड़ा वर्ग के सांसद होंगे। सभी पार्टियों से 8 सांसद OBC-EBC वर्ग के हैं। इनमें 7 NDA के और 1 राजद से हैं। दोनों गठबंधन की तरफ से एक भी सांसद राजपूत जाति के नहीं हैं। कांग्रेस के अखिलेश सिंह एक मात्र भूमिहार जाति के सांसद हैं।इससे पहले 2 भूमिहार सांसद RJD से एडी सिंह और कांग्रेस से अखिलेश सिंह थे। हाल में हुए चुनाव में एडी सिंह चुनाव हार गए तो अब इस समाज से सिर्फ अखिलेश सिंह बचे हैं। उनका 2030 तक कार्यकाल है।वहीं, JDU कोटे से हरिवंश नारायण सिंह इकलौते राजपूत सांसद थे। लेकिन इस बार हरिवंश की जगह नीतीश कुमार खुद राज्यसभा गए हैं। अब राज्यसभा में बिहार से कोई राजपूत सांसद नहीं बचा है।NDA कोटे से न तो भूमिहार सांसद और और न ही राजपूत। अगर NDA की बात करें तो गठबंधन की तरफ से 7 पिछड़ा वर्ग के नेता को राज्यसभा भेजा गया है। इनमें 4 EBC और 3 OBC वर्ग के हैं। वहीं, 3 ब्राह्मण, एक कायस्थ और एक दलित सांसद हैं।वहीं, महागठबंधन के 4 सांसदों में एक यादव, भूमिहार, ब्राह्मण और अल्पसंख्यक समुदाय के एक-एक सांसद हैं।हरिवंश बने रहेंगे राज्यसभा के उपसभापतिगठबंधन के तहत राज्यसभा में उपसभापति की जिम्मेदारी अभी तक JDU के हिस्से में है। JDU सांसद हरिवंश नारायण सिंह उपसभापति थे। 9 अप्रैल को कार्यकाल पूरा होने के बाद 10 अप्रैल को राष्ट्रपति कोटे से इन्हें एक बार फिर से राज्यसभा सांसद के लिए नामित कर दिया गया है। ऐसे में उपसभापति पद के लिए किसी अन्य व्यक्ति की संभावना अब समाप्त हो गई है।2030 तक राज्यसभा से साफ हो सकता है महागठबंधनविधानसभा चुनाव में करारी हार का खामियाजा महागठबंधन की पार्टियों को राज्यसभा में भी भुगतना पड़ सकता है। अगले विधानसभा चुनाव यानी 2030 तक राज्यसभा में महागठबंधन का सफाया हो सकता है। बिहार से कुल 16 राज्यसभा सीटों में से RJD के पास वर्तमान में पांच सीटें हैं और कांग्रेस के पास एक सीट है।2026 के बाद बिहार से राज्यसभा का अगला चुनाव 2028 की शुरुआत में होगा। इसमें राजद के फैयाज अहमद, भाजपा के सतीश चंद्र दुबे, मनन कुमार मिश्रा और शंभू शरण पटेल के साथ जदयू के खीरू महतो का कार्यकाल सात जुलाई, 2028 को पूरा होगा।इसके बाद 2030 की शुरुआत में चुनाव होना है। तब बीजेपी के धर्मशीला गुप्ता, भीम सिंह और जदयू के संजय कुमार झा के साथ राजद के मनोज कुमार झा और संजय यादव के साथ कांग्रेस के अखिलेश प्रसाद का कार्यकाल पूरा होगा। इन सभी चुनावों में महागठबंधन की हार तय मानी जा रही है, क्योंकि इनके पास जीत के लिए पर्याप्त नंबर्स ही नहीं है।
Source: Dainik Bhaskar April 10, 2026 10:57 UTC