PM Kisan scheme: non-bjp state governments will not support pm kisan scheme - पीएम-किसान योजना के लिए गैर बीजेपी राज्य सरकारें उत्साहित नहीं, किया सहयोग करने से मना - News Summed Up

PM Kisan scheme: non-bjp state governments will not support pm kisan scheme - पीएम-किसान योजना के लिए गैर बीजेपी राज्य सरकारें उत्साहित नहीं, किया सहयोग करने से मना


बीजेपी विरोधी दलों के शासन वाले राज्य केंद्र सरकार की पीएम-किसान योजना के बारे में उत्साहित नहीं हैं। इस योजना में खेती लायक दो हेक्टेयर तक जमीन वाले किसानों को 6000 रुपये सालाना दिए जाने हैं। बीजेपी को उम्मीद है कि इस स्कीम के जरिए वह अच्छी चुनावी फसल काट पाएगी, वहीं पश्चिम बंगाल की ममता सरकार इस योजना के सख्त खिलाफ दिख रही है। मध्य प्रदेश सरकार के एक मंत्री ने कहा कि किसानों को 'मामूली' रकम देने वाली इस योजना को लागू करने में कम से कम तीन महीने लगेंगे। ओडिशा और केरल इस स्कीम का अध्ययन कर रहे हैं।पश्चिम बंगाल सरकार पीएम-किसान स्कीम पर कदम बढ़ाने में दिलचस्पी नहीं ले रही है। ममता सरकार में कृषि मंत्री प्रदीप मजूमदार ने कहा कि राज्य को केंद्र से कोई दिशानिर्देश नहीं मिला है और राज्य सरकार इसमें सहयोग भी नहीं करेगी क्योंकि किसानों के लिए उसके पास अपनी स्कीम है। मजूमदार ने ईटी से कहा, 'गाइडलाइंस मिलने पर भी हम उनका पालन नहीं करेंगे। ममता बनर्जी ने कृषक बंधु योजना लागू की है, जिसमें किसानों को रबी और खरीफ सीजन की फसलों के लिए दो किस्तों में 5000 रुपये प्रति एकड़ सालाना दिए जाते हैं। बंटाई वाली खेती में साझेदारों के बीच यह रकम बांट दी जाती है। यह स्कीम 18 से 60 साल तक के किसान की स्वाभाविक या अस्वाभाविक वजहों से मृत्यु होने पर उसके परिवार को दो लाख रुपये सालाना की वन-टाइम ग्रांट भी देती है।'तिलहन, गेहूं और दलहन के प्रमुख उत्पादक मध्य प्रदेश में कृषक कल्याण एवं कृषि मंत्री सचिन सुभाष यादव ने कहा कि केंद्र ने राज्य से किसानों के लैंड रिकॉर्ड्स, आधार नंबर और मोबाइल नंबर की जानकारी मांगी है, लेकिन यह सब जुटाना आसान नहीं है। उन्होंने कहा, 'ये डिटेल्स देने की कोई डेडलाइन नहीं दी गई है। यह मुश्किल काम है। इसमें 2-3 महीने लग सकते हैं।'उन्होंने कहा कि पीएम-किसान योजना में औसतन 500 रुपये महीने की रकम बहुत कम है। उन्होंने कहा, 'यह किसानों का अपमान है। मोदी ने काला धन विदेश से लाने और हर नागरिक के खाते में 15 लाख रुपये जमा कराने का वादा 2014 में किया था। हम किसानों के लिए इस 6000 रुपये की मदद पर कैसे भरोसा कर सकते हैं? 'चावल, दलहन, तिलहन और जूट के प्रमुख उत्पादक ओडिशा के कृषि सचिव सौरभ गर्ग ने कहा, 'स्कीम की गाइडलाइंस हमें मिली हैं। उनका अध्ययन किया जा रहा है।' केरल के कृषि उत्पादन आयुक्त देवेंद्र कुमार सिंह ने कहा, 'लाभार्थियों का डेटाबेस बनाने के लिए हम और गाइडलाइंस का इंतजार कर रहे हैं।' तमिलनाडु के सहायक निदेशक (कृषि) पी वेंकटचलापति ने कहा कि किसानों के नाम राजस्व और सर्वे जैसे अलग-अलग विभागों में हैं, लिहाजा उनका मिलान करना होगा।


Source: Navbharat Times February 06, 2019 04:16 UTC



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