Patna News:लोगो के नाम पर लॉक-बाहर से सिलवाना मुश्किल - News Summed Up

Patna News:लोगो के नाम पर लॉक-बाहर से सिलवाना मुश्किल


नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होते ही जहां एक ओर स्कूलों में एडमिशन, किताबें और फीस को लेकर हलचल तेज हो जाती है, वहीं दूसरी ओर यूनिफॉर्म का मुद्दा भी पैरेंट्स के लिए बड़ी चिंता बनकर उभर रहा है। राजधानी पटना के कई प्राइवेट स्कूलों में इन दिनों यूनिफॉर्म को लेकर पैरेंट्स के बीच गहरी नाराजगी देखी जा रही है। पैरेंट्स का आरोप है कि ड्रेस कोड के नाम पर स्कूल मैनेजमेंट न केवल अनावश्यक दबाव बना रहा है, बल्कि उनकी जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी डाल रहा है।कई पैरेंट्स का कहना है कि उन्हें स्कूल द्वारा तय की गई चुनिंदा दुकानों से ही यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है, जहां कीमतें मार्केट की तुलना में काफी ज्यादा होती हैं। ऐसे में पैरेंट्स को यह संदेह हो रहा है कि इस पूरी व्यवस्था के पीछे स्कूल और दुकानदारों के बीच &कमिशन का खेल&य चल रहा है। मिडिल क्लास फैमिली के लिए यह खर्च और भी भारी पड़ रहा है, क्योंकि एक बच्चे की यूनिफॉर्म पर ही हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यही वजह है कि अब यह मुद्दा धीरे-धीरे एक बड़े विवाद का रूप लेता जा रहा है।-तय दुकानों से ही खरीदने का दबावपटना के कई प्राइवेट स्कूलों में पैरेंट्स को साफ तौर पर निर्देश दिया जाता है कि यूनिफॉर्म सिर्फ तय दुकानों से ही खरीदी जाए। स्कूल मैनेजमेंट का तर्क होता है कि इससे यूनिफॉर्मिटी बनी रहती है, लेकिन पैरेंट्स का कहना है कि यह एक तरह की जबरन व्यवस्था है.कई पैरेंट्स बताते हैं कि अगर वे बाहर से यूनिफॉर्म बनवाने की कोशिश करते हैं तो उसे स्वीकार नहीं किया जाता। यूनिफॉर्म पर लोगो लगा रहता है, जो बाहर से बनवाने में नहीं मिलता। इसलिए तय दुकानों से ही यूनिफॉर्म खरीदना मजबूरी हो गया है। इस वजह से पैरेंट्स को मजबूरन उन्हीं दुकानों पर जाना पड़ता है, जहां कीमतें मार्केट से कहीं ज्यादा होती हैं।-यूनिफॉर्म का एक सेट 1500 से 2500 में मिल रहा है. लोकल मार्केट में वही कपड़ा और डिजाइन आधी कीमत में उपलब्ध है। उदाहरण के तौर पर, जहां मार्केट में एक सेट यूनिफॉर्म 700 से 900 रुपये में तैयार हो सकता है, वहीं स्कूल की तय दुकान पर इसकी कीमत 1500 से 2500 रुपये तक पहुंच जाती है।पैरेंट्स का सवाल है कि जब क्वालिटी में कोई खास अंतर नहीं है, तो फिर इतनी कीमत क्यों वसूली जा रही है! कई मामलों में तो तय दुकानों की यूनिफॉर्म की सिलाई और कपड़ा भी सामान्य स्तर का ही पाया गया है।-क्वालिटी के साथ कीमत का खेलकई पैरेंट्स ने शिकायत की है कि महंगी यूनिफॉर्म होने के बावजूद उसकी क्वालिटी संतोषजनक नहीं है। कपड़ा जल्दी खराब हो जाता है, रंग उड़ जाता है और सिलाई भी टिकाऊ नहीं होती। एक पैरेंट ने बताया, हमने 2000 रुपये में यूनिफॉर्म खरीदी, लेकिन तीन महीने में ही उसकी हालत खराब हो गई। वहीं लोकल टेलर से बनवाई यूनिफॉर्म ज्यादा टिकाऊ निकली.”-हम तो सिर्फ यूनिफॉर्म बेचते हैंपटना में लोकल टेलर और स्कूल यूनिफॉर्म बेचने वाले दुकानदार इस पूरे विवाद से खुद को अलग बताते हैं। दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट की टीम से बातचीत में दुकानदारों ने साफ कहा कि उनका काम सिर्फ यूनिफॉर्म बेचना है, न कि कीमत तय करना। उनके मुताबिक, जो कपड़ा, सिलाई और अन्य लागत पड़ती है, उसी आधार पर प्राइस तय किए जाते हैं। कुछ दुकानदारों ने यह भी कहा कि स्कूल द्वारा तय डिजाइन और कपड़े के कारण ऑप्शन सीमित हो जाते हैं, जिससे कीमत पर उनका ज्यादा कंट्रोल नहीं रहता। ऐसे में वे खुद को इस कथित कमिशन के खेल से बाहर बताते हैं।मजबूरी में बढ़ता खर्चपटना के कंकड़बाग इलाके में रहने वाले पैरेंट अमित कुमार ने अपनी परेशानी साझा की। उनके दो बच्चे एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल ने उन्हें एक तय दुकान से ही यूनिफॉर्म खरीदने को कहा, जहां एक बच्चे की यूनिफॉर्म पर करीब 3000 रुपये खर्च हुए.दो बच्चों के लिए यह राशि 6000 रुपये तक पहुंच गई। अमित का कहना है कि अगर वे बाहर से यूनिफॉर्म बनवाते तो खर्च लगभग आधा होता। किताबें, फीस और ट्रांसपोर्ट के साथ यह अतिरिक्त बोझ मिडिल क्लास फैमिली के लिए मुश्किल बढ़ा देता है, खासकर मार्च-अप्रैल में।(खर्च का ब्रेकअप - इन्फोग्राफिक स्टाइल)एक स्टूडेंट की यूनिफॉर्म पर अनुमानित खर्चशर्ट (2 पीस)- 800 - 1200पैंट,स्कर्ट (2 पीस)- 1000 - 1600स्वेटर,ब्लेजर- 1200 - 2500टाई, बेल्ट, बैज- 300 - 600जूते और मोजे- 800 - 1500कुल खर्च- 4100 - 7400 प्रति स्टूडेंटक्या कहते हैं नियम और आपके राइट्स! शिक्षा विभाग और कंज्यूमर राइट्स के अनुसार, किसी भी स्कूल को पैरेंट्स को एक ही दुकान से खरीदारी करने के लिए बाध्य नहीं करना चाहिए। पैरेंट्स को यह अधिकार है कि वे तय ड्रेस कोड के अनुसार किसी भी दुकान या टेलर से यूनिफॉर्म तैयार करवा सकें.अगर कोई स्कूल ऐसा दबाव बनाता है, तो पैरेंट्स संबंधित शिक्षा विभाग या कंज्यूमर फोरम में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।पटना में पैरेंट्स के बीच इस इश्यू को लेकर नाराजगी लगातार बढ़ रही है। कई सोशल ऑर्गेनाइजेशन ने भी इसकी जांच की डिमांड की है। उनका कहना है कि स्कूल और दुकानदारों के बीच संभावित सेटिंग की जांच होनी चाहिए। कई स्कूल दो से अधिक ड्रेस लागू कर रहे हैं, जिससे खर्च बढ़ रहा है।- संजीव पाठक, महासचिव, बिहार पैरेंट्स एसोसिएशन, बिहारमेरी बेटी पांच साल की है और एलकेजी में पढ़ती है, लेकिन स्कूल ने चार सेट यूनिफॉर्म अनिवार्य कर दिया है, जिसमें विंटर ड्रेस भी शामिल है। शॉप पर जाने पर पता चला कि कुल खर्च करीब 7 हजार रुपये आएगा। छोटे बच्चों की स्टडी में इतना खर्च होना चिंता बढ़ा रहा है।- सुदीप झा, पैरेंट्सआज के टाइम में बच्चों को पढ़ाना आसान नहीं रह गया है। एजुकेशन का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। बुक और कॉपी के अलावा अब यूनिफॉर्म भी बड़ा खर्च बन गया है। एक बच्चे पर ही 5 से 7 हजार रुपये तक खर्च आ रहा है, जो मिडिल क्लास के लिए भारी है।- ऋषि ठाकुर, पैरेंट्सयूनिफॉर्म में &कमिशन का खेल&य एक नजर में-पटना के प्राइवेट स्कूलों में यूनिफॉर्म को


Source: Dainik Jagran March 26, 2026 13:41 UTC



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