भास्कर न्यूज, पुणे। विदेश में लाखों की नौकरी और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर भारतीय युवाओं को जिस अंधेरी दुनिया में धकेला जा रहा है, उसे अब ‘साइबर स्लेवरी’ कहा जा रहा है। विदेश में मोटे वेतन की नौकरी का सपना दिखाकर भारतीय युवाओं को साइबर गुलामी की दुनिया में धकेलने वाला अंतरराष्ट्रीय गिरोह सक्रिय है। कंबोडिया से लौटे रत्नागिरी के युवक की आपबीती ने चीनी सिंडिकेट द्वारा संचालित तथाकथित ‘स्कैम फैक्ट्रियों’ की भयावह सच्चाई उजागर कर दी है। पिंपरी चिंचवड़ साइबर पुलिस की जांच में सामने आया है कि कंबोडिया में सैकड़ों भारतीयों को बंधक बनाकर उनसे ऑनलाइन ठगी करवाई जा रही है।नौकरी के नाम पर बंधक बनाया37 वर्षीय पीड़ित बीएससी (आईटी) पास है और रत्नागिरी के अस्पताल में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत था। सोशल मीडिया पर नौकरी का विज्ञापन देखकर वह मुंबई पहुंचा, जहां महिला एजेंट ने कंबोडिया में एक लाख रुपए मासिक वेतन और रहने-खाने की सुविधा का लालच दिया। इसके बदले युवक से दो लाख रुपए वसूले गए। कंबोडिया के सिमरिप एयरपोर्ट पहुंचते ही उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया और आठ घंटे की यात्रा के बाद उसे अज्ञात परिसर में ले जाया गया। वहीं से शुरू हुई साइबर स्लेवरी, जहां दिन-रात मोबाइल और लैपटॉप पर बैठकर भारतीयों को ठगने के लिए मजबूर किया जाता है।ऐसे चलती हैं ‘स्कैम फैक्ट्रियां’युवक ने बताया कि जहां उसे ले जाया गया, वहां पहले से करीब 60 भारतीय युवक-युवतियां कैद थे, जिन्हें चीनी और कंबोडियन गिरोह भारतीय नागरिकों से ठगी करने के लिए मजबूर कर रहा था। वहां चीनी सिंडिकेट के अधिकारी भारतीयों से जबरन साइबर ठगी करवाते हैं। पुरुषों को वाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए भारत के अमीर कारोबारियों से संपर्क करने को कहा जाता है। शुरुआती बातचीत के बाद महिला एजेंट ‘पिग बुचरिंग’ और ‘शेयर मार्केट इन्वेस्टमेंट’ जैसे हथकंडों से भारी मुनाफे का झांसा देकर लोगों से ऑनलाइन पैसे ऐंठती हैं। टारगेट पूरा न होने या ‘खराब परफॉर्मेंस’ के नाम पर कर्मचारियों को सबके सामने बेरहमी से पीटा जाता है। बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं, न पासपोर्ट, न पैसा, पूरी तरह डिजिटल गुलाम बना दिया जाता है।चार महीने तक शोषणलगातार चार महीने तक मानसिक और शारीरिक यातना झेलने के बाद युवक को बिना एक भी रुपए दिए काम से निकाल दिया गया। कंपनी ने उसका मोबाइल फोन फॉर्मेट कर दिया। किसी तरह उसने परिवार से संपर्क किया, जिसके बाद परिजनों ने कंबोडिया से मुंबई लौटने का टिकट भेजा। भारत लौटने के बाद जब वह दुबई जाने की कोशिश कर रहा था, तब पिंपरी चिंचवड़ साइबर पुलिस ने उससे पूछताछ की, जिसमें पूरा मामला सामने आया।साइबर स्लेव फैक्ट्रियों का बड़ा अड्डाकंबोडिया अब भारतीयों के लिए सबसे खतरनाक साइबर साइबर स्लेव फैक्ट्रियों का बड़ा अड्डा बनता जा रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार दिसंबर-25 तक कंबोडिया से 2,265 भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया गया है। कंबोडिया से संचालित स्कैम के कारण भारत में अब तक 500 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हो चुका है। डिजिटल अरेस्ट, फर्जी ट्रेडिंग एप्स और हनी ट्रैप वहां के प्रमुख हथियार हैं। साइबर पुलिस ने नागरिकों को सतर्क करते हुए कहा है कि कंबोडिया (+855), चीन, दुबई जैसे देशों से आने वाले आकर्षक जॉब ऑफर्स पर तुरंत भरोसा न करें। टूरिस्ट वीजा पर काम कराना गैरकानूनी है और यही साइबर स्लेवरी का पहला कदम होता है।विदेशी नौकरी का लालच अब साइबर गुलामी में बदल रहा है। बिना सत्यापन के कंबोडिया जैसे देशों में जाना आजादी खतरे में डालने जैसा है।- विशाल हिरे, सहायक पुलिस आयुक्त, अपराध शाखा, पिंपरी चिंचवड़
Source: Dainik Bhaskar January 10, 2026 08:53 UTC