पूनम कलापुरे, पुणे। पुणे में इस माह होने वाली देश की सबसे बड़ी साइकिल रेस पुणे ग्रैंड टूर 2026 की तैयारियां अंतिम चरणों में है। कुल 437 किलोमीटर लंबी इस चार चरणीय रेस की विजेता टीम को मिलने वाली ट्रॉफी काफी आकर्षक है। छत्रपति शिवाजी महाराज के समय चलन में रही अष्टकोणीय मुद्रा से प्रेरित करीब पांच किलो की ट्रॉफी 21 इंच लंबी है। इस ट्रॉफी में तांबे की खास कारीगरी की गई है जिसे मार्डन आर्ट से निखारा गया है।19 से 23 जनवरी तक आयोजित इस साइकिल रेस की ट्रॉफी के डिजाइनर पुणे निवासी पुष्कर इंगले हैं। इंगले ने भास्कर को बताया हमने साइकिलिंग प्रतियोगिता के मैदान के साथ विभिन्न रेसों का भी अध्ययन किया। साइकिल रेस के लिए खिलाड़ी एक विशेष स्टेडियम में अभ्यास करते हैं। उस स्टेडियम को वेलोड्रोम कहा जाता है। यह थालीनुमा आकार का स्टेडियम होता है, जिस पर तेज गति से साइकिलिंग की जाती है। इसी को देखते हुए हमने इसकी डिजाइन में स्टेडियम का लुक देने का भी प्रयास किया है। पुष्कर ने बताया ट्रॉफी को अंतिम रूप देने से पहले इसे विभिन्न तत्वों से बनाकर देखा गया। पहले इसे कार्डबोर्ड से बनाया गया फिर थर्मोकोल से बनाकर देखा। इसके बाद लकड़ी और फिर एल्युमिनियम से डिजाइन किया गया। इसमें सफलता मिलने के बाद तांबे से इसे गाड़ा गया। पहली बार में ही साइकिल रेस से जुड़े अधिकारियों को यह ट्रॉफी पसंद आई। यह ट्रॉफी बनाने के लिए हमें दो माह का समय लगा। पुणे के तांबट गली के डिजाइनर रणदे ने ट्रॉफी निर्माण में विशेष भूमिका निभाई। पुष्कर ने बताया इस ट्रॉफी का वजन ज्यादा रखने के पीछे भी कारण है। यदि कम वजन वाली ट्रॉफी बनाई जाती तो खिलाड़ी एक हाथ से उठा सकता था लेकिन इस वजनदार ट्रॉफी को उठाने के लिए उसे दोनों हाथों का उपयोग करना होगा। दोनों हाथों से ट्रॉफी उठाने पर लोगों को अच्छा भी लगेगा और खिलाड़ी को गर्व की अनुभूति भी होगी। हमें इस बात की भी खुशी है कि जो ट्रॉफी हमने बनाई है उसे पुणे में ही दी जाएगी।
Source: Dainik Bhaskar January 08, 2026 08:13 UTC