भास्कर न्यूज, पुणे। महाराष्ट्र सरकार ने अपने कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य के 52 प्रगतिशील किसानों को यूरोप अध्ययन भ्रमण पर भेजा है। यह कार्यक्रम कृषि विभाग के 2025–26 पहल के अंतर्गत आयोजित किया गया है।इस वर्ष इस योजना को और मजबूत किया गया है, जिसमें प्रत्येक प्रतिभागी को मिलने वाली अनुदान राशि को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दिया गया है। कृषि मंत्री दत्तात्रय भरने ने इस वित्तीय सहायता को दोगुना करने का निर्णय लिया है ताकि अधिक से अधिक किसान वैश्विक स्तर के अनुभव प्राप्त कर सकें।भ्रमण से पहले, मंत्री भरने ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से किसानों से संवाद किया और उन्हें नवीनतम कृषि प्रथाओं को अपनाने तथा अपने अनुभवों को राज्य के अन्य किसानों के साथ साझा करने के लिए प्रेरित किया। कृषि निदेशक (एक्सटेंशन एंड ट्रेनिंग) रफीक नैकवाड़ी ने भी किसानों को शुभकामनाएँ दी और ज्ञान साझा करने के महत्व पर जोर दिया।भ्रमण के दौरान किसान चार कृषि में अग्रणी यूरोपीय देशों का दौरा करेंगे:फ्रांस: यहां किसान बड़े पैमाने पर गेहूँ, जौ और मक्का की खेती करने वाले खेतों और आधुनिक डेयरी इकाइयों का निरीक्षण करेंगे। उनका उद्देश्य यंत्रिकीकरण, मिट्टी प्रबंधन और फसल चक्र प्रथाओं को समझना है।स्विट्ज़रलैंड: प्रतिभागी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त जैविक कृषि अनुसंधान संस्थान (FiBL) का दौरा करेंगे और सतत कृषि प्रणालियों तथा पर्वतीय डेयरी सहकारी समितियों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।नीदरलैंड: दुनिया के प्रसिद्ध आल्समीर फ्लावर मार्केट में किसान अंतरराष्ट्रीय फूल व्यापार, नीलामी प्रणाली, ग्रीनहाउस तकनीक, जलवायु नियंत्रण और जल प्रबंधन प्रथाओं का अध्ययन करेंगे।जर्मनी: कार्यक्रम में सटीक कृषि, उन्नत कृषि यंत्रिकीकरण और सहकारी कृषि प्रसंस्करण मॉडलों से अवगत कराना शामिल है।अधिकारियों के अनुसार, यह पहल उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मूल्य संवर्धन, निर्यात क्षमता, किसान उत्पादक संगठन (FPOs), सहकारी ढ़ांचे, डेयरी प्रबंधन और जलवायु-सहिष्णु कृषि को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार की गई है।भ्रमण से लौटने के बाद, किसान जिले स्तर पर ज्ञान-साझा सत्र आयोजित करेंगे और सफल प्रथाओं को पूरे महाराष्ट्र में लागू करने का प्रयास करेंगे।कृषि विभाग ने उम्मीद जताई है कि बढ़ी हुई अनुदान राशि और अंतरराष्ट्रीय अनुभव से आधुनिक तकनीकों को अपनाने की गति तेज होगी, किसानों की आय बढ़ेगी और महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और सतत बनाए रखने में मदद मिलेगी।
Source: Dainik Bhaskar February 16, 2026 11:20 UTC