भास्कर न्यूज, पुणे। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की नदियों की बाढ़ रेखा के पुनः सर्वेक्षण और प्रभावित क्षेत्रों में अधिकृत इमारतों के पुनर्विकास के लिए उपाय सुझाने हेतु 12 सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है। यह समिति नगर विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कार्य करेगी और दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी।पुणे की मुला-मुठा नदी सहित राज्य की अन्य नदियों की नीली और लाल बाढ़ रेखाओं का नए सिरे से निर्धारण किया जाएगा। सरकार के इस निर्णय से बाढ़ रेखा के कारण लंबे समय से अटके पुनर्विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है।उच्च न्यायालय में दायर हुई थी जनहित याचिकाराज्य सरकार ने पहले ही नदियों का सर्वेक्षण कर बाढ़ रेखा तय करने के आदेश दिए थे। वर्ष 2024 में बाढ़ रेखा को लेकर उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई थी। उस समय न्यायालय ने अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन उस समिति की रिपोर्ट अब तक प्रस्तुत नहीं की गई है। इसके बाद अब बाढ़ रेखा के पुनः सर्वेक्षण के लिए नई समिति का गठन किया गया है।समिति को आवश्यकता अनुसार संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों और संस्थाओं से जानकारी एकत्र करने तथा आवश्यक सिफारिशों सहित प्रारूप रिपोर्ट दो माह के भीतर सरकार की मंजूरी के लिए प्रस्तुत करनी होगी।नगर विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव होंगे अध्यक्षसमिति की अध्यक्षता नगर विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव करेंगे। इसमें जलसंपदा, पर्यावरण तथा राहत एवं पुनर्वसन विभागों के अपर मुख्य सचिव, मेरी (MERI) संस्था के महासंचालक, नगर रचना निदेशक, विभिन्न महानगरपालिकाओं के आयुक्त और नगर परिषदों के मुख्याधिकारी शामिल होंगे।बाढ़ रेखा में त्रुटियों की शिकायतेंजलसंपदा विभाग द्वारा पूर्व में निर्धारित बाढ़ रेखाओं में त्रुटियों की शिकायतें सामने आई थीं। इसके चलते नगर विकास विभाग ने पुनः सर्वेक्षण का निर्णय लिया है। उच्चस्तरीय समिति के गठन से अब इस मुद्दे का समाधान निकलने की संभावना जताई जा रही है।पुणे की मुला-मुठा सहित कई नदियों की बाढ़ रेखा के कारण सैकड़ों हेक्टेयर जमीन ‘नो-डेवलपमेंट’ जोन में चली गई थी। इसका सीधा असर पुनर्विकास परियोजनाओं और नई इमारतों के निर्माण पर पड़ा।प्रभावित रहिवासियों को मिल सकता है न्यायबाढ़ रेखा में फंसी पुरानी सोसायटियों और अधिकृत इमारतों का पुनर्विकास राज्य के कई शहरों में गंभीर समस्या बन गया है। समिति को विशेष रूप से यह सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है कि बाढ़ प्रभावित अधिकृत इमारतों को टीडीआर (ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स) का उपयोग कर निर्माण अनुमति किस प्रकार दी जा सकती है।समिति बदली हुई परिस्थितियों और वर्षा के बढ़ते पैटर्न को ध्यान में रखते हुए नीली और लाल बाढ़ रेखा का पुनर्निर्धारण करेगी। रिपोर्ट तैयार करते समय नदी किनारे की घनी आबादी, घरों की संख्या, इमारतों की संरचनात्मक स्थिरता, भू-स्तर (प्लिंथ लेवल) और नदी की जल वहन क्षमता जैसे तकनीकी पहलुओं का गहन अध्ययन किया जाएगा।
Source: Dainik Bhaskar February 20, 2026 08:26 UTC