भास्कर न्यूज, पुणे। पर्यावरण वैज्ञानिक और पश्चिमी घाट की जैवविविधता संरक्षण के अग्रणी विचारक डॉ. माधव गाडगिल का बुधवार रात पुणे में निधन हो गया। वे 83 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से लंबी बीमारी से जूझ रहे थे। उनके पुत्र सिद्धार्थ गाडगिल ने उनके निधन की जानकारी दी। डॉ. गाडगिल का उपचार चल रहा था। उपचार के दौरान ही उन्होंने अंतिम सांस ली।डॉ. माधव गाडगिल ने भारत में पर्यावरणीय चेतना को जागृत करने, विशेष रूप से पश्चिमी घाट की जैवविविधता और पारिस्थितिकी संतुलन के संरक्षण के लिए अथक प्रयास किए। पश्चिमी घाट में हो रहे अनियंत्रित विकास कार्यों से पर्यावरण और जीव-जंतुओं पर पड़ने वाले गंभीर दुष्परिणामों को लेकर उन्होंने सबसे पहले सरकार और प्रशासन को सचेत किया था।पश्चिमी घाट के संरक्षण और संवर्धन के लिए वर्ष 2011 में तैयार किया गया ‘गाडगिल रिपोर्ट’ विकास के नाम पर पर्यावरण को होने वाले नुकसान के खिलाफ एक मजबूत और दूरदर्शी दस्तावेज माना जाता है।डॉ. गाडगिल के योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिली। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने उन्हें वर्ष 2024 में प्रतिष्ठित ‘चैम्पियन ऑफ द अर्थ’ पुरस्कार से सम्मानित किया था।
Source: Dainik Bhaskar January 08, 2026 11:29 UTC