राज्य ब्यूरो, जागरण, कोलकाता। बंगाल की मुख्यमंत्री व टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के बाद मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों का नाम हटाए जाने के विरोध में शुक्रवार को यहां धरना शुरू किया।मध्य कोलकाता के धर्मतल्ला में मेट्रो चैनल पर दोपहर दो बजे से धरना शुरू करते हुए ममता ने भाजपा और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोलते हुए बंगाली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की साजिश रचने का आरोप लगाया और उन्हें बेनकाब करने की कसम खाई।टीएमसी सुप्रीमो ने कहा कि मैं बंगाली मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने के भाजपा-चुनाव आयोग के षड्यंत्र का पर्दाफाश करूंगी। उन्होंने दावा किया कि चुनाव को अपने पक्ष में मोडऩे के लिए भाजपा और आयोग द्वारा जानबूझकर नाम हटाए गए हैं।विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले केंद्रीय चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ के आठ मार्च को राज्य के दौरे पर पहुंचने से ठीक पहले ममता द्वारा धरना शुरू करने के कदम से तृणमूल और आयोग के बीच टकराव और बढ़ गया है। ममता का यह धरना कब तक चलेगा यह अभी स्पष्ट नहीं है।कई जीवित मतदाताओं को मृत घोषित कर दिया गया-सीएम ममता ममता ने यह भी आरोप लगाया कि अंतिम मतदाता सूची में कई जीवित मतदाताओं को मृत घोषित कर दिया गया है। उन्होंने इनमें से कई मतदाताओं को धरना मंच पर प्रस्तुत भी किया और कहा कि चुनाव आयोग को शर्म आनी चाहिए कि उसने एसआइआर में उन मतदाताओं को मरा हुआ चिन्हित कर दिया जो जिंदा हैं और यहां मेरे साथ मौजूद हैं।ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा के एजेंट के तौर पर काम कर रही है, जो खुद एक बेशर्म राजनीतिक ताकत है। अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद हो रहा धरना मालूम हो कि राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी द्वारा यह धरना प्रदर्शन निर्वाचन आयोग की ओर से एसआइआर के बाद बीते 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूचियों को प्रकाशित करने के कुछ ही दिनों बाद किया जा रहा है, जिसने राज्य के मतदाताओं की संख्या को काफी हद तक बदल दिया है।पिछले साल चार नवंबर को बंगाल में एसआइआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद हाल में प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची से 63.66 लाख नाम हटाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 8.3 प्रतिशत है। बंगाल में मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर लगभग 7.04 करोड़ रह गई है एसआइआर के कारण बंगाल में मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर लगभग 7.04 करोड़ रह गई है। इसके अतिरिक्त 60.06 लाख से अधिक मतदाताओं को न्यायिक जांच के अधीन विचाराधीन श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है कि आने वाले हफ्तों में कानूनी जांच के माध्यम से उनकी पात्रता निर्धारित की जाएगी।
Source: Dainik Jagran March 07, 2026 12:33 UTC