आज 'डांसिंग काउ' न केवल रिटेल स्टोर्स और ई-कॉमर्स पर उपलब्ध है, बल्कि भारत के 500 से ज्यादा कैफे में इसके दूध का इस्तेमाल किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में इसका रेवेन्यू 2.2 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। अब टारगेट वित्त वर्ष 2025-26 तक इसे बढ़ाकर 4.8 करोड़ रुपये करने का है। आरोही अब खुद अपने ब्रांड का चेहरा बनकर इंस्टाग्राम पर अपनी यात्रा साझा करती हैं। उनका सपना इस ब्रांड को भारत का सबसे बड़ा डेयरी रिप्लेसमेंट ब्रांड बनाना और भविष्य में आईपीओ लाना है।यह सफर आसान नहीं था। आरोही को सही रेसिपी तैयार करने में ही 10 महीने का वक्त लगा। सबसे बड़ी चुनौती भारत में प्लांट-बेस्ड मिल्क के लिए प्लांट ढूंढना था। उन्होंने पुणे में एक फैक्ट्री के साथ तालमेल बैठाया। आज भी वह अपनी रेसिपी को गुप्त रखती हैं। उनका एक भरोसेमंद टीम मेंबर हर बैच के समय मौजूद रहता है और मशीनों में खुद सीक्रेट सामग्री डालता है। मार्च 2023 में आधिकारिक लॉन्च के बाद उन्होंने कैफे और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को लैक्टोज इनटोलरेंस के प्रति जागरूक करना शुरू किया।भारत लौटने पर आरोही ने देखा कि यहां वेगन और डेयरी-फ्री उत्पादों की भारी कमी है। इसी बीच उनकी मां को डायबिटीज का पता चला। डॉक्टर ने उन्हें डेयरी प्रोडक्ट छोड़ने की सलाह दी। भारत जैसे दूध प्रेमी देश में विकल्प की कमी को देखते हुए आरोही ने खुद 'ओट मिल्क' (जई का दूध) बनाने का फैसला किया। उन्होंने अपने पति अनमोल गोयल के साथ मिलकर सेविंग से 'डांसिंग काउ' की नींव रखी। उनका मकसद एक ऐसा दूध बनाना था जो स्वाद में असली जैसा हो, लेकिन पचाने में आसान।लखनऊ की रहने वाली आरोही सूर्या की शुरुआती पढ़ाई चुनौतीपूर्ण रही। इंजीनियरिंग के दौरान उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। वह फेल होते-होते बचीं। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और दुबई से एमबीए करने के बाद वहां एचटीसी जैसी बड़ी कंपनी में मार्केटिंग हेड के पद तक पहुंचीं। 1.1 करोड़ रुपये के सालाना वेतन के बावजूद उनके भीतर एक उद्यमी छुपा था। उन्होंने दुबई में अपना पहला स्टार्टअप 'यल्ला' (Yalla) सफलतापूर्वक चलाया और उसे बेचकर 2022 में भारत वापस लौट आईं।
Source: Navbharat Times January 08, 2026 07:03 UTC