मैट चितरंजन (को-फाउंडर और सीईओ): NYU से फाइनेंस और इकोनॉमिक्स में बैकग्राउंड के साथ मैट बिजनेस को बढ़ाने के लिए जरूरी स्ट्रैटेजिक और ऑपरेशनल समझ लाए। कॉफी के लिए उनका शुरुआती जुनून कंपनी के प्रोडक्ट विजन और क्वालिटी के प्रति कमिटमेंट के पीछे ड्राइविंग फोर्स बन गया। नम्रता अस्थाना (को-फाउंडर): साइकोलॉजी, डिजाइन और कम्युनिकेशन में नम्रता का बैकग्राउंड ब्रांड बनाने में अहम था। उन्होंने यूनिक कस्टमर एक्सपीरियंस बनाने और ब्रांड की ट्रांसपेरेंसी और क्वालिटी की वैल्यूज के आस-पास एक कम्युनिटी बनाने पर फोकस किया। उनकी डिजाइन की समझ ब्रांड के एस्थेटिक और कैफै के इंटीरियर में साफ दिखती है। शिवम शाही (को-फाउंडर और सीओओ): शिवम एक इंजीनियर हैं। वह बाद में टीम में शामिल हुए। उन्होंने बिजनेस के जरूरी ऑपरेशनल पहलुओं की जिम्मेदारी संभाली। इसमें सप्लाई चेन मैनेजमेंट और कम्प्लायंस से लेकर कैफे नेटवर्क के तेजी से विस्तार तक तमा जिम्मेदारियां शामिल थीं। ब्लू टोकाई को एक छोटी रोस्टरी से एक कामयाब नेशनल ब्रांड बनाने में उनकी भूमिका बहुत जरूरी थी।यह ब्रांड दिल्ली में नम्रता अस्थाना के माता-पिता के घर में एक खाली बेडरूम से शुरू हुआ था। इसकी शुरुआत एक छोटी रोस्टरी के तौर पर हुई थी। इसके फाउंडर्स का मकसद सीधे भारतीय किसानों से हाई-क्वालिटी अरेबिका बीन्स लेकर उन्हें घरेलू कंज्यूमर्स के लिए रोस्ट करना था। यह उस समय की बात है जब भारत की ज्यादातर प्रीमियम कॉफी एक्सपोर्ट की जाती थी। 'ब्लू टोकाई' का मतलब मोर के पंख (टोकाई) होता है।मैट चितरंजन, नम्रता अस्थाना और शिवम शाही ने 2013 में ब्लू टोकाई कॉफी रोस्टर्स की शुरुआत की थी। यह भारत के बड़े स्पेशलिटी कॉफी ब्रांड में से एक है। कंपनी प्रीमियम इंडियन अरेबिका बीन्स की सोर्सिंग, रोस्टिंग और रिटेलिंग पर फोकस करती है। देशभर में इसके 150 से ज्यादा कैफे हैं। साथ ही जापान और दुबई में इंटरनेशनल मौजूदगी भी है।मैट चितरंजन और नम्रता अस्थाना की कहानी कॉमन पैशन की है। यह घर के शौक से बढ़ते हुए एक मल्टी-चैनल एंटरप्राइज में बदल गया। इसने वित्त वर्ष 2024-25 में साल-दर-साल 50% की बढ़ोतरी के साथ 332.7 करोड़ रुपये की कमाई की। वहीं, 2023-24 में कंपनी का रेवेन्यू 221 करोड़ रुपये था।
Source: NDTV February 26, 2026 03:08 UTC