Hindi NewsLocalMpBhopalThe Corporation Produced CNG From Sugarcane Waste. निगम ने गन्ने के वेस्ट से बनवाई CNG: बाजार से कम रेट में मिलेगी, शहर में हर दिन 15 से 20 टन वेस्ट निकलता हैभोपाल 5 घंटे पहले लेखक: अनूप दुबेकॉपी लिंकराजधानी की सड़कों पर गर्मियों में दिखने वाला गन्ने का वेस्ट (खोई) अब कचरा नहीं, बल्कि शहर की रफ्तार बनेगा। नगर निगम ने एक अनूठी पहल करते हुए गन्ने के वेस्ट से सीएनजी बनाने का सफल ट्रायल पूरा कर लिया है।इसमें एक निजी प्लांट संचालक ने निगम को खोई से सीएनजी बनाकर सफल ट्रायल दिखाया है। खास बात यह है कि यह सीएनजी निगम को बाजार भाव से कुछ कम रेट पर उपलब्ध होगी, जिससे निगम के खर्चों में कटौती होगी और पर्यावरण भी साफ रहेगा।शहर में भीषण गर्मी के बीच करीब 1500 से 2000 गन्ने की चरखियां संचालित हो रही हैं। इनसे रोजाना 15 से 20 टन वेस्ट निकलता है। अब तक इस कचरे को आदमपुर खंती ले जाना पड़ता था, जहां खाद बनने में 50 दिन लगते थे।अब प्राइवेट कंपनी इस कचरे को सीधे कलेक्शन सेंटर से उठाएगी, जिससे निगम का ट्रांसपोर्टेशन खर्च शून्य हो जाएगा। शुरुआत में अभी 3 टन की वेस्ट सीएनजी प्लांट पहुंच पा रहा है। कंपनी ने बड़े वाहन को लगाया है, जिससे हर दिन करीब 15 से 20 टन वेस्ट प्लांट को मिलेगा।तीन फायदे बदलेंगे शहर की सूरतखर्च में कमी: आदमपुर खंती तक कचरा ढोने का डीजल बचेगा।जल्द निपटान: जो वेस्ट खाद बनने में 50 दिन लेता था, उससे चंद दिनों में ईंधन बनेगा।सस्ता ईंधन: निगम को कम दाम पर सीएनजी मिलेगी, जिससे जनता के पैसे की बचत होगी।निगम को जरूरत की 65 फीसदी सीएनजी मिलेगीविशेषज्ञों के मुताबिक, 100 टन गन्ने के वेस्ट से लगभग 4 प्रतिशत यानी 4000 किलोग्राम सीएनजी तैयार होती है। ट्रायल के दौरान गन्ने के रेशों से सफलतापूर्वक गैस बनाई गई है। कंपनी ने निगम को बाजार रेट से सस्ती गैस देने का ऑफर भी दिया है।रोजाना 20 टन गन्ने का वेस्ट मिलता है तो रोजाना निगम को 800 किलोग्राम सीएनजी मिल सकेगी। निगम को अपनी 275 गाड़ियों के लिए रोजाना लगभग 1200 किलो सीएनजी की जरूरत होती है। यानी 65 फीसदी से अधिक मांग पूरी हो सकती है, लेकिन यह केवल गर्मी के दिनों में ही होगा।300 दुकानदारों को किया अलर्ट... निगम ने करीब 300 चरखी संचालकों को निर्देश दिए। दुकानदार गन्ने के वेस्ट को अलग बोरियों में भर रहे हैं। निगम की गाड़ियां यह वेस्ट कचरा स्टेशन पहुंचाती हैं, वहां से कंपनी के कर्मचारी उसे रातीबढ़ स्थित सीएनजी प्लांट ले जाते हैंइससे शहर के कचरे को साफ करने में मदद मिलेगी। गन्ने की चरखी वालों को निर्देश दिए हैं कि वेस्ट को बोरियों में भरें। इसमें कांच और प्लास्ट समेत अन्य कचरा न मिलाएं। स्वच्छता के साथ भविष्य में इससे निगम को आर्थिक फायदा होगा। - संस्कृति जैन, कमिश्नर नगर निगम.
Source: Dainik Bhaskar April 13, 2026 03:29 UTC