यूनिसेफ के मुताबिक, 11 मार्च से 16 दिसंबर के बीच दुनियाभर में 11 करोड़ 60 लाख बच्चे पैदा हो सकते हैंइस दौरान अमेरिका छठे स्थान पर रह सकता है, यहां इस बीच 30 लाख से ज्यादा बच्चों के पैदा होने का अनुमानदैनिक भास्कर May 07, 2020, 09:12 PM ISTनई दिल्ली. इस साल भारत में मार्च से दिसंबर के बीच सबसे अधिक 2 करोड़ बच्चे पैदा हो सकते हैं। यह अनुमान यूनाइटेड नेशंस चिल्ड्रन्स फंड यानी यूनिसेफ ने 10 मई को आने वाले मदर्स डे से पहले लगाया है। यूनिसेफ के मुताबिक, 11 मार्च से 16 दिसंबर के बीच दुनियाभर में कुल 11 करोड़ 60 लाख बच्चों के पैदा होने का अनुमान है। इसमें अकेले भारत में 2.1 करोड़, जबकि चीन में 1.35 करोड़ बच्चे जन्म लेंगे। यूनिसेफ ने कहा कि कोरोना संक्रमण की वजह से मां और बच्चे को जिंदगी की कठोर सच्चाई का सामना करना पड़ सकता है।यूनीसेफ के मुताबिक, नाइजीरिया में 60.4 लाख, पाकिस्तान में 50 लाख और इंडोनेशिया में 40 लाख बच्चे पैदा होंगे। अमेरिका बच्चों के जन्म की अनुमानित संख्या के मामले में छठे स्थान पर हो सकता है। यहां इस दौरान 30 लाख से ज्यादा बच्चों के पैदा होने का अनुमान है।औसत गर्भावस्था की अवधि के आधार पर आकलनयूनिसेफ की समीक्षा का आधार संयुक्त राष्ट्र की वर्ल्ड पॉपुलेशन डिवीजन 2019 की रिपोर्ट है। एक औसत गर्भावस्था आमतौर पर पूरे 9 महीने या 40 सप्ताह तक रहती है। ऐसे में बच्चों के पैदा होने का आकलन करने के लिए संस्था ने इसे ही पैमाना बनाया।यूनिसेफ की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हेनरिटा फोर ने कहा कि नई मांओं और नवजातों को जिंदगी की कठोर सच्चाई का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि, कोविड-19 की रोकथाम के लिए दुनियाभर में कर्फ्यू और लॉकडाउन जैसे हालात हैं। ऐसे में जरूरी दवाओं और उपकरणों का अभाव, एएनएम और हेल्थ वर्कर्स की कमी से गर्भवती महिलाओं को जूझना पड़ेगा। संक्रमण के डर की वजह से गर्भवती महिलाएं खुद भी हेल्थ सेंटर्स पर जाने से कतराएंगी।लॉकडाउन और कर्फ्यू से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ेगायूनिसेफ की ग्लोबल रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 को रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन जैसे उपायों की वजह से जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ सकता है। इससे नवजात और मां दोनों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है। विकासशील देशों में यह खतरा ज्यादा है क्योंकि, इन देशों में कोरोना महामारी आने से पहले ही शिशु मृत्यु दर ज्यादा है। ऐसे में कोविड-19 की वजह से इसमें इजाफा हो सकता है।हर साल 28 लाख गर्भवती महिलाओं और नवजातों की मौत होती हैयूनिसेफ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कोविड-19 महामारी से पहले भी हर साल दुनियाभर में करीब 28 लाख गर्भवती महिलाओं और नवजातों की मौत होती आई है। हर सेकंड 11 मौतें। ऐसे में संस्था ने हेल्थ वर्कर्स की ट्रेनिंग और दवाइयों के उचित इंतजाम पर जोर देने के लिए कहा है ताकि गर्भावस्था के दौरान महिलाओं और उसके बाद नवजातों की जान बचाई जा सके।
Source: Dainik Bhaskar May 07, 2020 14:47 UTC