उत्तर प्रदेश के 8 जिलों में खोले गए 20 लाख जनधन खातों में एक भी पैसा नहीं है। इनमें चार जिले पूर्वांचल और चार पश्चिमी यूपी के हैं। इनमें महिलाओं के खाते पुरुषों से ज्यादा हैं। ये खाते बैंकों के लिए बोझ बन गए हैं क्योंकि इन्हें सक्रिय रखने के लिए बैंकों को सालाना 700 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। वहीं, बैंकों ने शून्य बैलेंस वाले इन खातों को मनी म्यूल अकाउंट के रूप में संदिग्ध श्रेणी में डाल दिया है।विज्ञापनविज्ञापनजीरो बैलेंस खाते वाले जिले जिला खातों की संख्या आगरा 2.39 लाख आजमगढ़ 2.71 लाख बिजनौर 2.27 लाख गाजीपुर 2.09 लाख जौनपुर 3.32 लाख कुशीनगर 2.45 लाख मेरठ 2.26 लाख सहारनपुर 2.36 लाखबैंकों की ओर से राज्य सरकार को भेजी गई जनधन खातों की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि यूपी में कुल जनधन खातों की संख्या 10.22 करोड़ है। वहीं, देश में 57.58 करोड़ खाते हैं। इस लिहाज से यूपी की हिस्सेदारी करीब 18% है, जो देश में सर्वाधिक है। इनमें 53% महिला खाताधारक हैं और इनमें 58 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा रकम जमा है। पूर्वांचल और पश्चिमांचल के आठ जिलों में 1.60 करोड़ से ज्यादा जनधन खाते हैं। इन्हीं में 20 लाख खातों का बैलेंस शून्य है। शेष खातों में करीब 7800 करोड़ रुपये जमा हैं।एक जनधन खाते को सक्रिय और व्यवस्थित रखने के लिए बैंकों को हर साल लगभग 3500 रुपये तक का खर्च उठाना पड़ता है। इस खर्च में आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, कर्मचारियों का वेतन और शाखा का रखरखाव शामिल है। इस तरह अकेले इन 8 जिलों के खाली खातों को मेनटेन रखने में ही बैंकों को हर साल 700 करोड़ रुपये का बोझ उठाना पड़ रहा है।बैंक खाली या निष्क्रिय जनधन खातों को मनी म्यूल के रूप में संदिग्ध इसलिए मानते हैं क्योंकि इनका उपयोग अपराधियों द्वारा अवैध धन को सफेद करने या साइबर ठगी के पैसे को घुमाने के लिए किया जा सकता है। जब लंबे समय से खाली पड़े खाते में अचानक बड़ी रकम आती है और उसे तुरंत निकाल लिया जाता है तो बैंक इसे संदिग्ध गतिविधि मानता है। ऐसे खातों में अक्सर अपडेटेड केवाईसी नहीं होता जिसका फायदा उठाकर साइबर अपराधियों द्वारा फर्जी दस्तावेजों के जरिये इनके संचालन की आशंका रहती है।
Source: NDTV April 03, 2026 04:17 UTC