राजेश राज, गजरौला (अमरोहा): फिल्म लावारिस का यह गीत जिसका कोई नहीं उसका तो खुदा है यारो.. उन अनाथ बाराजेश राज, गजरौला (अमरोहा): फिल्म लावारिस का यह गीत जिसका कोई नहीं उसका तो खुदा है यारो.. उन अनाथ बालिकाओं पर चरितार्थ हो रहा है, जिनके अपनों का कोई पता नहीं है। उनके स्वस्थ होने की भी कोई गारंटी नहीं है मगर प्रभू यीशू के स्नेह सदन में इन अनाथ बालिकाओं को परवरिश मिल रही है। उनकी जिदगी यहीं पल-बढ़कर आगे बढ़ रही है। यह स्नेह सदन औद्योगिक नगरी में नेशनल हाईवे किनारे मुहल्ला नाईपुरा सेंट मेरीज के एकदम बराबर में है। मसीह समुदाय की संस्था के द्वारा संचालित यह स्नेह सदन नामक भवन दो मंजिला और खासा भव्य है। इसका निर्माण हुए करीब चार साल बीत चुके हैं। इसका उद्देश्य यहां अनाथ व अस्वस्थ बालिकाओं-महिलाओं को रखकर उनकी परवरिश करना है। वैसे तो यह भवन तमाम जरुरी सुविधाओं के हिसाब से सौ बालिकाओं-महिलाओं की देखरेख के हिसाब से बना है, लेकिन मौजूदा समय में यहां आठ बालिकाओं की परवरिश हो रही है। इनमें एक बड़ी तो बाकी सभी छोटी हैं। चार ऐसी बालिकाएं हैं, जो चल-फिर भी नहीं सकती। मानसिक व शारीरिक रुप से तो सभी अस्वस्थ हैं। उन्हें इतना भी नहीं पता कि वह कौन हैं, उनके माता-पिता कौन है? अपना-पराया क्या होता है? इन सब बातों से इन सभी को कोई मतलब नहीं है। बस उनकी जिदगी यहां कट रही है। ऐसा लगता है कि जैसे यहां इन यतीम बालिकाओं की देखभाल प्रभू ईसा मसीह के द्वारा ही चमत्कारी ढंग से हो रही हो। चूंकि यहां पालना पाने वाली बालिकाएं खुश हैं। देखभाल करने वालों में इतना घुल-मिल गई हैं कि उन्हें वही अपने लगते हैं। शायद इसी कारण संचालिका सिस्टर मेलवी जिस तरफ होती हैं, वहीं यह बालिकाएं पहुंच जाती हैं। उनके हाथ से भोजन व अन्य कार्यो में सहयोग से वह खुश प्रतीत होती हैं।-----------------------------------------------------स्नेह सदन चार साल पुराना है। यहां आठ अनाथ बालिकाएं हैं, जिनकी यहां रखकर देखभाल की जा रही है। यह सभी अस्वस्थ हैं। इनका कोई अपना नहीं है। यहां उनकी देखभाल के साथ खाने-पीने व अन्य सभी बातों का ध्यान रखा जाता है। समय-समय पर चिकित्सक भी उनके स्वास्थ के परीक्षण के लिए आते हैं।-सिस्टर मिलवी संचालिका, स्नेह सदन, गजरौला।-------------------------------------------------------------------------------------सौ अनाथ बालिकाओं के हिसाब से बना है स्नेह सदनगजरौला : स्नेह सदन सौ अनाथ बालिकाओं को पालना देने के हिसाब से बना है लेकिन यहां अभी आठ अनाथ बालिकाएं होने के कारण यहां एक इंचार्ज व दो सहयोगी सिस्टर हैं। यही तीनों उनकी देखभाल करती हैं। वहीं यहां रहने से लेकर सुरक्षा तक का प्रबंध है। बाहर गेट लगा है ताकि कोई बाहर से अंदर व अंदर से बाहर बिना मर्जी कोई नहीं आ जा सके। गेट पर चौकीदार की डयूटी रहती है।डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस
Source: Dainik Jagran December 24, 2020 19:06 UTC