नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। नेशनल कंपनी लॉ टिब्यूनल (एनसीएलटी) की मुंबई बेंच ने दिवालिया कंपनी रेंड एंड टेलर को समाप्त करने (लिक्विडेशन) का आदेश दिया है। इसका बोलीदाता पात्रता की शर्ते पूरी नहीं कर पाया, इस वजह से कंपनी की संपत्तियां बेचकर उसे समाप्त करने का आदेश दिया गया हैं।हालांकि एनसीएलटी ने कंपनी रिजोल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी) को निर्देश दिया है कि कभी मशहूर रहे इसके ब्रांड समुचित तरीके से बेचा जाए और कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जाए।रेड एंड टेलर के कई बोलियां लगाई गईं। रेड एंड टेलर कर्मचारी संघ ने कंपनी को समाप्त करने के एनसीएलटी के फैसले को नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट टिब्यूनल (एनक्लैट) में चुनौती देने का फैसला किया है। संघ ने चार जनवरी को बेंच के समक्ष बोली लगाई थी। उस समय वह अपंजीकृत यूनियन थी। इस बोली के बाद कंपनी को समाप्त करने की प्रक्रिया रोक दी गई जैसा कर्जदार और आरपी चाहते थे।कर्मचारी संघ के प्रवक्ता विवेक पंडित ने बताया कि इंडिया गैस द्वारा पेश अभिरुचि (ईओआइ) खारिज की गई। हमने एनसीएलटी के फैसले को एनक्लैट में शुक्रवार को चुनौती देने का फैसला किया है। इंडिया गैस के प्रतिनिधि इसके बारे में एनसीएलटी को संतुष्ट नहीं कर पाए कि कंपनी की नेटवर्थ 50 करोड़ है। इसके बाद उसकी बिड को खारिज कर दिया गया।नितिन कासलीवाल की कंपनी रेड एंड टेलर पर कर्जदारों का करीब 4100 करोड़ रुपये बाकी हैं।Posted By: Nitesh
Source: Dainik Jagran February 06, 2019 04:52 UTC