Hindi NewsLocalRajasthanBarmer11 Years Of The Most Hinted Crude Pipeline Coming Out Of 270 Villages In Eight Districts Of Two States,Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐपकच्चे तेल को विभिन्न रिफाइनरियों तक पहुंचाती है: दो राज्यों के आठ जिलों, 270 गांवो से निकलने वाली हीटेड क्रूड पाइपलाइन को हुए 11 सालबाड़मेर 16 घंटे पहलेकॉपी लिंकबाड़मेर के धोरो से निकलती तेल पाइप लाइन।राजस्थान के थार रेगिस्तान में स्थित बाड़मेर के विश्वस्तरीय तेल क्षेत्रों से कच्चे तेल को देश की विभिन्न रिफाइनरियों तक पहुंचाने वाली दुनिया की सबसे लंबी बाड़मेर-भोगत हीटेड क्रूड पाइपलाइन ने अपने ऑपेरशन के 11 साल पूरे कर लिए हैं।यह पाइप लाइन दो राज्यों (राजस्थान, गुजरात) के आठ जिलों, 270 गांवों में 34 नदी मार्गों और 38 नहर मार्गों से निकलती है। तेल और गैस की खोज और उत्पादन करने वाली भारत की निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी केयर्न ऑयल ऐंड गैस, वेदांता लिमिटेड इस पाइपलाइन को ऑपरेट कर रही है।यह पाइपलाइन बाड़मेर के मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल से शुरू होती है और इसका डिलीवरी बिंदु भोगत, गुजरात में स्थित है। भारतीय इंजीनियरिंग कर तकनीकी का चमत्कार मानी जाने वाली लगभग 720 किलोमीटर लंबी इस पाइपलाइन का निर्माण मंगला से उत्पादित कच्चे तेल के परिवहन को सुगम बनाने के लिए किया गया था। यह दुनिया की सबसे लंबी लगातार गर्म रहने वाली और इंसुलेटेड पाइपलाइन है और भारत में यह अपनी तरह की पहली पाइपलाइन है। इस पाइपलाइन को ब्रिटिश सुरक्षा परिषद द्वारा 2020 में मान्यता दी गई थी।केयर्न ऑयल एंड गैस, वेदांता लिमिटेड के डिप्टी सीईओ प्रचुर साह ने कहा कि, “हम भारत की हाइड्रोकार्बन क्षमता में मजबूती से विश्वास करते हैं और अपने परिचालन के लिए नवीनतम तकनीक में निवेश करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह पाइपलाइन हमारे उद्योग की अग्रणी पद्धतियों का प्रमाण है। हम एक ऊर्जा-सक्षम भारत का सपना साकार करने के लिए बाड़मेर से कई और वर्षों के सफल उत्पादन की आशा करते हैं और यह पाइपलाइन इसे वास्तविकता बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटक है।"पाइपलाइन की निगरानी सेंसर व ड्रोन सेपाइपलाइन जमीन के ऊपर और नीचे दोनों जगह बनाई गई है और दोनों राज्यों में फैले कच्चे तेल के प्रवाह की पड़ताल करने के लिए नवीनतम तकनीक से युक्त है। पाइपलाइन पर किसी भी अनधिकृत गतिविधि के खिलाफ लगातार निगरानी और कार्रवाई करने के लिए मोशन सेंसर और ड्रोन तकनीक को तैनात किया गया है। गौरतलब है कि मंगला पिछले दो दशकों में भारत में सबसे फलदायक तटवर्ती तेल खोज मानी जाती है। हालाँकि, इस क्षेत्र से उत्पादित कच्चे तेल की मोम जैसी प्रकृति ने किसी नजदीकी रिफाइनरी की अनुपस्थिति में परिवहन की एक चुनौती पेश की।तेल-क्षेत्र से निकलने वाले चिपचिपे तेल का गुरुत्वाकर्षण एपीआई 25 से 30 के बीच होता है जो इसे मोम जैसा बनाता है, और यह कमरे के तापमान पर ठोस हो जाता है। पाइपलाइन एक स्किन इफ़ेक्ट हीट मैनेजमेंट सिस्टम (एसईएचएमएस) से सुसज्जित है जो कच्चे तेल को पूर्व-निर्धारित तापमान पर रखती है और पूरी पाइपलाइन में सुचारू प्रवाह में मदद करती है। इसे मौसम या अन्य प्राकृतिक घटनाओं के कारण तापमान में किसी परिवर्तन से बचाने के लिए बाहर से इंसुलेटेड किया गया है।
Source: Dainik Bhaskar May 28, 2021 12:07 UTC