संजय जायसवाल ने जताई आपत्ति तो कुशवाहा ने दिया जवाब संजय जायसवाल ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, 'आज बिहार सरकार ने बहुत सारे फैसले लिए हैं जो आज की परिस्थिति में बहुत अनिवार्य हैं। मैं कोई विशेषज्ञ तो नहीं हूं फिर भी सभी अच्छे निर्णयों में इस एक निर्णय को समझने में असमर्थ हूं कि रात का कर्फ्यू लगाने से करोना वायरस का प्रसार कैसे बंद होगा। अगर कोरोना वायरस के प्रसार को वाकई रोकना है तो हमें हर हालत में शुक्रवार शाम से सोमवार सुबह तक की बंदी करनी ही होगी। घरों में बंद इन 62 घंटों में लोगों को अपनी बीमारी का पता चल सकेगा और उनके बाहर नहीं निकलने के कारण बीमारी के प्रसार को रोकने में कुछ मदद अवश्य मिलेगी।' बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने आगे लिखा- 'वैसे करोना प्रसार रोकने की महाराष्ट्र में सर्वोत्तम स्थिति यही रहती कि 4 दिन रोजगार और 3 दिन की बंदी। बिहार में अभी इसकी जरूरत नहीं है पर अगर हम हफ्ते में 2 दिन कड़ाई से कर्फ्यू नहीं लगा पाये तो हमारी स्थिति भी महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ जैसी हो सकती है।' संजय जायसवाल की आपत्ति पर कुशवाहा ने किया पलटवार करते हुए ट्वीट किया- 'जायसवाल जी, अभी राजनीतिक बयानबाजी का वक्त नहीं है!' पीएम मोदी और सीएम नीतीश के बयान में भी अलगाव पिछले साल विधानसभा चुनाव रिजल्ट आने के बाद बीजेपी की 74 सीटों के मुकाबले जेडीयू महज 43 सीटें जीतने में सफल रही। माना जाता है कि बीजेपी का स्टेट यूनिट नहीं चाहता था कि मुख्यमंत्री की कुर्सी जेडीयू के खाते में जाए, लेकिन बीजेपी के केंद्रीय नेताओं के हस्तक्षेप के बाद एनडीए गठबंधन ने नीतीश कुमार को एक बार फिर से मुख्यमंत्री पर बिठाया। यह बात खुद नीतीश कुमार पत्रकारों के सामने कबूल चुके हैं। अब कोरोना के बढ़ते खतरों के बीच महाराष्ट्र और दिल्ली की फैक्ट्रियों में काम काज रोक दिया गया है। इसके बाद पिछले साल की तरह एक बार फिर से मजदूरों का पलायन शुरू हो चुका है। ऐसे में पहले नीतीश कुमार ने जोर देकर बिहार के लोगों से अपील की कि वे जल्द से जल्द अपने राज्य लौट आएं। वहीं मंगलवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में पीएम मोदी ने अपील की कि जो मजदूर जहां हैं वहीं रुकें। जुलाई 2017 में बीजेपी+जेडीयू का गठबंधन दोबारा से बनने के बाद से शायद ही कोई मौका होगा जब पीएम और सीएम के बयान में अंतर दिखा हो। यहां तक कि पिछले साल जब सभी राज्य बस और अन्य संसाधनों से अपने लोगों को अपने राज्य में बुला रहे थे तब नीतीश कुमार ने पीएम मोदी के संपूर्ण लॉकडाउन का हवाला देकर बिहारी लोगों के लिए संसाधन मुहैया कराने से इनकार कर दिया था।डिप्युटी CM तारकिशोर प्रसाद भी छलका चुके हैं दर्द इसी साल मार्च में डिप्युटी सीएम तारकिशोर प्रसाद बीजेपी महिला मोर्चा की दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति के मंच पर पहुंचे थे। यहां उनका दर्द फूटा। तारकिशोर प्रसाद ने कहा था कि बिहार में चल रही एनडीए की सरकार में बीजेपी बड़े भाई की भूमिका में है, लेकिन सरकार के कामकाज और नीतियों पर बीजेपी का असर अपेक्षा के अनुरूप नहीं दिख रहा है। तारकिशोर प्रसाद ने कहा था कि यह सच है कि बिहार सरकार के कार्यक्रमों में हम नहीं दिख रहे। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि अब बिहार सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली में बीजेपी का असर दिखेगा। इसी दौरान जेडीयू के पूर्व विधायक श्याम बहादुर सिंह ने भी आरोप लगाया था कि बीजेपी की वजह से जेडीयू को कम सीटें आई हैं। उन्होंने इस गठबंधन के भविष्य को लेकर चिंता जताई थी।बिहार की कानून व्यवस्था और अफसरशाही पर सवाल उठाते रहे हैं बीजेपी नेता बिहार में लॉ एंड ऑर्डर का विभाग खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार संभाल रहे हैं। इसके बाद भी हाल के दिनों में राज्य में अपराध की घटनाओं खासकर हत्या और हत्या के प्रसास और चोरी-डकैती के मामलों में काफी वृद्धि हुई है। इसको लेकर बिहार बीजेपी के कई कद्दावर नेता सवाल उठाते रहे हैं। समस्तीपुर में बीजेपी नेता व पूर्व जिला पार्षद पर 15 राउंड फायरिंग, मुंगेर में बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता अफजल शम्सी, पटना में भाजपा नेता राजेश कुमार झा का मर्डर, मधुबनी कांड जैसी घटनाओं के वक्त बीजेपी के कई कद्दावर नेता राज्य के लॉ एंड ऑर्डर पर सवाल उठाते रहे हैं। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, अश्विनी चौबे के अलावा बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल भी लॉ एंड ऑर्डर पर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। गिरिराज सिंह लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि नीतीश सरकार में अफसर किसी नेता की नहीं सुनते हैं। उन्होंने बिहार के अफसरों को 'बांस से मारो..' तक कह दिया था। वहीं संजय जायसवाल ने बेतिया में चोरी की घटना पर फेसबुक पोस्ट लिखकर राज्य की पुलिसिंग सिस्टम पर सवाल उठाये थे।वशिष्ठ नारायण सिंह के तल्ख कॉमेंट पर सुशील मोदी ने संभाला था मोर्चा अरुणाचल प्रदेश में जेडीयू के 6 विधायकों के बीजेपी में शामिल कराने पर वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा था कि ये ज़ख़्म बहुत गहरा है, ऐसा भविष्य में न हो इसे बीजेपी को देखना होगा। उन्होंने कहा कि हम तो समर्थन दे रहे थे, लेकिन बावजूद इसके जो घटना घटी वो ठीक नहीं है। वहीं सीएम नीतीश कुमार ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कहा कि हमारे मनोबल को तोड़ने की कोशिश की गई, लेकिन हम घबराते नहीं हैं। जेडीयू के इस बदले तेवर को देखते हुए आखिरकार बीजेपी ने डैमेज कंट्रोल का रास्ता अपनाया और सुशील मोदी को आगे कर दिया था। नीतीश कुमार के पुराने दोस्त और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि बीजेपी-जेडीयू गठबंधन बिहार में अटूट है।शराबबंदी पर बीजेपी-जेडीयू नेताओं के बयान में दिख चुका है अलगाव बिहार में पूर्ण शराबबंदी नीतीश कुमार की सरकार के बड़े फैसलों में गिना जाता है। लेकिन बिहार में चोरी-छिपे शराब की स्मगलिंग पर जारी है। इसको लेकर भी बीजेपी के नेता यदा कदा पूर्ण शराबबंदी के फैसले पर सवाल उठाते रहे हैं। इसी साल फरवरी में बीजेपी एमएलसी संजय पासवान ने शराबबंदी को खत्म करने की बात कही तो जेडीयू तिलमिला
Source: Navbharat Times April 22, 2021 02:00 UTC