खत्म होगा 2 दशक लंबा इंतजार: 20 साल से बेगानों जैसे जी रहे थे जिंदगी, केंद्र के नागरिकता देने के फैसले पर 250 परिवारों में जगी आस - News Summed Up

खत्म होगा 2 दशक लंबा इंतजार: 20 साल से बेगानों जैसे जी रहे थे जिंदगी, केंद्र के नागरिकता देने के फैसले पर 250 परिवारों में जगी आस


Hindi NewsLocalPunjabJalandharLife Was Living Like A Begone For 20 Years, Hope Arose In 250 Families On The Decision Of The Center To Give CitizenshipAds से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐपखत्म होगा 2 दशक लंबा इंतजार: 20 साल से बेगानों जैसे जी रहे थे जिंदगी, केंद्र के नागरिकता देने के फैसले पर 250 परिवारों में जगी आसजालंधर 10 घंटे पहले लेखक: मनीष शर्माकॉपी लिंकजालंधर में रह रही शरणार्थी अमरो देवी अपनी व्यथा सुनाती हुई।केंद्रीय गृह मंत्रालय के पाकिस्तान, अफगानिस्तान व बांग्लादेश के गैर मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने के नोटिफिकेशन से जालंधर के 250 परिवारों का 2 दशक लंबा इंतजार खत्म हो गया है। वह भारत में तो 2001 से रह रहे हैं लेकिन नागरिकता नहीं पा सके। हर साल उन्हें बेगानों की तरह पुलिस से वैरिफिकेशन करवानी पड़ती। अब उनके आस जगी है कि उन्हें शरणार्थी होने के धब्बे से निजात मिलेगी। शुक्रवार रात को नोटिफिकेशन जारी होने के बाद जालंधर के शरणार्थी परिवारों ने नागरिकता के लिए डिप्टी कमिश्नर को आवेदन करने की तैयारी शुरू कर दी है।नागरिकता के लिए शरणार्थी परिवारों द्वारा तैयार किए कागजात।हमने तो जिंदगी गुजार दी, अब बच्चों को अच्छा भविष्य मिलेगा : अमराे देवीअमरो देवी कहती हैं कि वो 2001 में पाकिस्तान से आए थे। सियालकोट में रहते थे लेकिन मुस्लिम देश होने की वजह से बहुत परेशानियां होती थी। हिंदुओं की लड़की को मुस्लिम युवक ले जाता था। अमरो कहती हैं कि हमने तो जिंदगी गुजार दी, लेकिन खुशी की बात है कि हमारी आने वाली पीढ़ी काे अच्छा भविष्य मिल जाएगा।कालारामनागरिकता न मिलने से मजदूरी ही कर पाते, अब बच्चे कर सकेंगे नौकरी : कालारामकालाराम कहते हैं कि वो 2006 में पाकिस्तान से आए थे। वह देश दूसरे धर्म के लोगों के लिए अच्छा नहीं है। धार्मिक तौर पर वहां काफी परेशानी थी। बाहर नहीं घूम सकते थे। काम नहीं कर सकते थे। सियालकोट व पेशावर से कई परिवार तब भारत आए थे। नागरिक नहीं थे तो मजदूरी करने तक ही सीमित रह गए थे। अब उनके बच्चे भी नौकरी के लायक हो जाएंगे।लालचंदवीजा अप्लाई, बच्चों के एडमिशन में दिक्कत होगी दूर : लालचंदलालचंद कहते हैं कि मैं सियालकोट से 2000 में अटारी बॉर्डर के रास्ते भारत आए थे। पाकिस्तान में संस्कार या शादी में बहुत दिक्कत होती थी। वहां जागरण भी नहीं कर सकते थे। धार्मिक स्तर पर बहुत परेशानी होती थी। नागरिकता न होने वजह से बहुत परेशानी थी। वीजा अप्लाई या बच्चों के स्कूल में एडमिशन में दिक्कत होती थी। आधार कार्ड व डेट ऑफ बर्थ सर्टिफिकेट मांगा जाता था।


Source: Dainik Bhaskar May 30, 2021 07:07 UTC



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