जापान ने अंतरिक्ष में 30 करोड़ किलोमीटर दूर से मंगाया 'काला सोना', तस्‍वीरें कर रही हैरान - News Summed Up

जापान ने अंतरिक्ष में 30 करोड़ किलोमीटर दूर से मंगाया 'काला सोना', तस्‍वीरें कर रही हैरान


​ऐस्टरॉइड से आए नमूने बेहद खास, चट्टान की तरह से कठोर जापानी विशेषज्ञों ने कहा कि ऐस्टरॉइड Ryugu से आए ये नमूने मोटाई में 0.4 इंच के हैं और चट्टान की तरह से कठोर हैं। इससे पहले जापानी विशेषज्ञों ने हयाबूसा 2 यान से आए एक और नमूने की तस्‍वीर जारी की थी। इसमें छोटे, काले और रेत की तरह से कण दिखाई पड़े थे। अंतरिक्ष यान ने फरवरी 2019 में इस नमूने को दूसरी जगह से अलग से इकट्ठा किया था। जापानी यान ने दूसरी बार ऐस्‍टरॉइड के सतह पर से नमूनों को इकट्ठा किया। इस नमूने को यान के दूसरे हिस्‍से में पाया गया है। जापानी यान दूसरी बार जुलाई 2019 में ऐस्‍टरॉइड पर उतरा था। इस दौरान यान ने एक इंपैक्‍टर को ऐस्‍टरॉइड की सतह पर गिराया था जिसने उसकी सतह पर विस्‍फोट किया। इससे ऐस्‍टरॉइड के वे नमूने ऊपर आ गए जो स्‍पेस रेडिएशन से प्रभावित नहीं थे।​रियगु एक जापानी नाम है जिसका मतलब 'ड्रैगन का महल' जापानी प्रफेसर उसूई ने बताया कि ऐस्‍टरॉइड से आए नमूनों के दोनों सेट Ryugu की सतह पर मिट्टी के नीचे स्थित चट्टान की अलग-अलग कठोरता को दिखाते हैं। उन्‍होंने कहा कि एक संभावना यह भी है कि दूसरी बार यान ऐसी जगह पर उतरा जहां पर सतह के नीचे कठोर चट्टान थी। उन्‍होंने कहा कि इसी वजह से ऐस्‍टरॉइड के बड़े-बड़े टुकड़े मिले और यान के अंदर आ गए। पहली बार ऐस्‍टरॉइड पर उतरने के बाद जो नमूने मिले थे, वे छोटे, काले और रेत की तरह से थे। रियगु एक जापानी नाम है जिसका मतलब 'ड्रैगन का महल' होता है। रियगु एक ऐसा ऐस्‍टरॉइड है जो पृथ्‍वी के बेहद करीब है। यह आकार में करीब 1 किलोमीटर का है। धरती से रियगु की दूरी करीब 30 करोड़ किलोमीटर है। इन अनमोल नमूनों के अब साइंस ऑब्जर्वेशन ऑपरेशन किए जाएंगे और धरती और चांद को साइंटिफिक इंस्ट्रुमेंट्स की मदद से ऑब्जर्व किया जाएगा।​पृथ्‍वी के लिए 'रक्षा कवच' तलाशने निकला जापानी यान जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी का Hayabusa 2 मिशन दिसंबर 2014 में लॉन्च किया गया था। यह 2018 में Ryugu पर पहुंचा और 2019 में सैंपल इकट्ठा किए गए जिनमें से कुछ सतह के नीचे थे। Hayabusa 2 कैप्सूल पहली बार किसी ऐस्टरॉइड के अंदरूनी हिस्से से चट्टानी सैंपल लेने वाला मिशन बना है। ऐसा दूसरी बार है कि किसी ऐस्टरॉइड से अनछुए मटीरियल को धरती पर वापस लाया गया है। इसे ऑस्ट्रेलिया में सफल लैंडिंग के बाद खोज लिया गया। इस सफलता के बाद जापानी यान अब एक और ऐस्‍टरॉइड की यात्रा पर निकल गया है जो करीब 11 साल में पूरी होगी। इस ऐस्‍टरॉइड का नाम है '1998KY26'। इस यात्रा का मकसद यह जानना है कि अगर कोई चट्टान अंतरिक्ष से धरती की ओर आती है तो उससे कैसे अपना बचाव करना है।


Source: Navbharat Times December 25, 2020 03:11 UTC



Loading...
Loading...
  

Loading...

                           
/* -------------------------- overlay advertisemnt -------------------------- */