Hindi NewsNationalDay Of Political Horse Racing, Camp And Planning Begins In Karnatakaभास्कर ओपिनियन नतीजे आज: कर्नाटक में राजनीतिक घोड़े दौड़ाने का दिन, खेमेबाजी और योजनाएं शुरूएक घंटा पहलेकॉपी लिंककर्नाटक हर लिहाज़ से महत्वपूर्ण है। इसलिए यहाँ के चुनाव नतीजे भी अहम माने जा रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस के लिए कर्नाटक चुनाव की महत्ता इसलिए ज़्यादा है क्योंकि छह महीने बाद तीन हिंदी भाषी राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुनाव होने वाले हैं। कर्नाटक की जीत या हार इन तीन राज्यों के चुनावों के लिए उत्साह या निराशा का कारण बनने वाली है। केवल इतना ही नहीं, 2024 के लोकसभा चुनावों में सीटों की घट- बढ़ भी कर्नाटक के ये नतीजे तय कर सकते हैं।हालाँकि राज्य विधानसभा और लोकसभा चुनावों में मुद्दों और मूड का भारी फ़र्क़ रहता है, लेकिन अपनी सरकार रहने का कोई तो फ़ायदा होता ही है।कर्नाटक में आज वोटों की गिनती होना है। EVM कड़ी सुरक्षा में रखी गई हैं।वैसे कर्नाटक चुनाव के नतीजों पर अब तक जो एग्जिट पोल सामने आए हैं उनमें भाजपा को किसी ने भी बहुमत नहीं दिया है। कुछ एग्जिट पोल में कांग्रेस को ज़रूर बहुमत में दिखाया है, जबकि ज़्यादातर ने कांग्रेस को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में प्रस्तुत किया है। अगर किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला तो जनमत को पूरी तरह धकिया दिया जाएगा और जिसमें ज़ोर होगा वही सत्ता सुंदरी का वरण करने में कामयाब होगा।पूर्व प्रधानमंत्री हरदनहल्ली डेड्डेगौडा देवगौडा की पार्टी जेडीएस, किंगमेकर बनने की फ़िराक़ में हैं। अभी से उनकी पार्टी की तरफ़ से कहा जाने लगा है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों की ओर से संपर्क किया जा रहा है। हम किसका साथ देंगे, यह चुनाव परिणाम के बाद तय किया जाएगा। लड्डू फूट रहे हैं।दरअसल, राज्यों के चुनावों में छोटी और क्षेत्रीय पार्टियाँ बड़े आनंद में रहती हैं। अगर किसी को बहुमत नहीं मिला तो किंगमेकर बन बैठती हैं। कभी-कभी तो खुद किंग बनने की हैसियत में भी आ जाती हैं। उधर कांग्रेस और भाजपा की तरफ़ से हर स्थिति में अपनी सरकार बनाने की योजनाएँ तैयार हैं। अगर कम सीटों की ज़रूरत रहती है तो सबसे पहले निर्दलीय प्रत्याशियों पर डोरे डाले जाएँगे।क्योंकि सुरसा की तरह मुँह फैलाए बैठे जेडीएस के बिना सहयोग के सरकार बनती है तो इनके लिए सबसे अच्छा होगा। अगर ज्यादा सीटों की ज़रूरत हुई तो फिर जेडीएस की शरण में जाए बिना काम बनने वाला नहीं है।हालाँकि एग्जिट पोल हमेशा सही निकलें, यह ज़रूरी नहीं, लेकिन एक अंदाज़ा तो लग ही जाता है कि हवा किस तरफ़ की है, किस तरह की है! बहरहाल, 13 मई की सुबह ही असल नतीजे पता चल जाएँगे और तभी मिलेगा तमाम क़यासों को विराम।
Source: Dainik Bhaskar May 13, 2023 03:25 UTC