Hindi NewsLocalRajasthanJaipurHusbands Of Women Councilors Are Now Out Of The Official Meetings Of The Corporation, Jaipur Municipal Corporation Commissioner Issued Orderपार्षद पतियों की नो-एंट्री: महिला पार्षदों के पति अब निगम की ऑफिशियल बैठकों से आउट, जयपुर नगर निगम आयुक्त ने जारी किया आदेशजयपुर 11 घंटे पहलेकॉपी लिंकजयपुर नगर निगम में जीतकर आई महिला पार्षदों के पति अब नगर निगम की ऑफिशियल बैठकों में अपनी नेतागिरी नहीं चला सकेंगे। नगर निगम ग्रेटर आयुक्त यज्ञमित्र सिंह ने पिछले दिनों एक आदेश जारी करते हुए ऐसे जनप्रतिनिधियों को नगर निगम की ऑफिशियल बैठकों से दूरी बनाए रखने के लिए कहा है। वार्ड कार्यालयों पर जनसुनवाई हो या एरिया के इंस्पेक्टर या किसी कर्मचारी को दिशा-निर्देश देने हो ऐसे तमाम कार्यो में इन पतियों का हस्तक्षेप बहुत रहता है। इसको लेकर नगर निगम के कई कर्मचारी-अधिकारी इसकी शिकायत भी उच्च स्तर पर कर चुके है।दरअसल जयपुर में नगर निगम में कई बैठकों में महिला पार्षदों की जगह उनके पति या उनके रिश्तेदार प्रतिनिधि के तौर पर आ जाते है और अधिकारियों को दिशा-निर्देश देने लगते है। इसके अलावा कोविड के दौरान कुछ बैठकें ऑनलाइन भी हुई, जिसमें भी महिला पार्षदों के बजाए उनके पति उपस्थित हुए। इसे देखते हुए नगर निगम आयुक्त ने आज एक आदेश जारी करते हुए नगर निगम की आॅफिशियल बैठकों या सेमिनार में पार्षद को ही उपस्थित रहने के लिए कहा है। अगर उनकी जगह उनका पति या कोई दूसरा प्रतिनिधि आता है तो वह नियम के विरूद्ध होगी।33 फीसदी महिलाओं का है आरक्षणराजस्थान में नगर पालिका के चुनाव में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण है। जयपुर नगर निगम ग्रेटर के 150 वार्डो में से 33 फीसदी से ज्यादा वार्डो में महिला उम्मीदवार जीतकर आई है। इन 150 में से 54 वार्डो में महिला उम्मीदवार जीतकर पार्षद बनी है। इन्ही महिला पार्षदों में से कई के पति या परिवार के अन्य प्रतिनिधि नगर निगम की बैठकों में कई बार शामिल होते है।20 साल पुराने आदेशों का दिया हवालाआयुक्त ने जो आदेश आज जारी किया है। उसमें 20 साल पुराने एक आदेश का हवाला दिया है। जिसमें इसी तरह महिला या पुरूष जनप्रतिनिधि के रहते सरकारी ऑफिशियल बैठक में उनके प्रतिनिधियों के वहां आने पर रोक लगाई है। जानकारों की माने तो कई महिला जो कम पढ़ी लिखी होती है और पार्षद, सरपंच या विधायक का चुनाव जीतकर आ जाती है तो उन्हे राजकार्य को संचालित करने में परेशानी आती है। इसे देखते हुए उनके परिवार के ही लोग उनके कार्यो में हस्तक्षेप करते है। आज भी राज्य में कई महिला सरपंच ऐसी है, जिन्हे लिखना तक नहीं आता, लेकिन उनके सभी कार्य उनके पति या उनके परिवार के ही किसी सदस्य की मंशा पर होते है।
Source: Dainik Bhaskar June 02, 2021 11:48 UTC