ये बेहद आम लोग होते हैं जो न ट्विटर पर आकर अपने मुद्दे को ट्रेंड करा सकते हैं और न ही टीवी चैनलों के सामने रो सकते हैं. हमने 4 फरवरी के प्राइम टाइम में पर्ल एग्रोटेक कोरपोरेशन लिमिटेड के पीड़ितों की कहानी बताई थी. तीन साल बाद भी किसी को पता नहीं कि पैसा किसे मिला. इसलिए सर्वोच्च अदालत का हर फैसला इंसाफ ही हो यह ज़रूरी नहीं. कागज़ पर तो इंसाफ मिल गया है मगर तीन साल बाद तक पीएसीएल पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिला है.
Source: NDTV February 05, 2019 17:15 UTC