बंजर धरती पर लिखी हरियाली की इबारत - News Summed Up

बंजर धरती पर लिखी हरियाली की इबारत


पीएचसी सलेमपुर परिसर को हरा -भरा किया औषधीय पौधे लगाए गांव टोड़ निवासी रमेशचंद्र की 14 साल की मेहनत का नतीजा।केसी दरगड़, हसायन/हाथरस : ऐसी ऊसर धरती जहां कभी घास तक दिखाई नहीं देती थी, आज उसपर हरियाली खिलखिला रही है। इस हरियाली के पीछे सासनी के गांव टोड़ निवासी रमेशचंद्र की 14 साल की मेहनत है। वे चिलचिलाती धूप, मूसलधार बारिश व कड़ाके की ठंड में जुटे रहे। परिसर को हरा-भरा रखने के लिए कभी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने हरिवंशराय बच्चन की कविता की उस पंक्ति को भी साकार कर दिया कि 'लहरों से डर कर कभी नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।' हालांकि दो बार लगाए गए पौधे सूख गए लेकिन तीसरी बार मेहनत रंग लाई।ऐसे मिली प्रेरणा : 2007 में जब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सलेमपुर शुरू हुआ था, तब भवन के अलावा परिसर में सिर्फ रेत और ऊबड़-खाबड़ दिखाई देता था। आसपास ऊसर जमीन थी। पेशे से किसान रमेशचंद्र जब अस्पताल आते थे तो उन्हें बड़ा अजीब सा लगता था। उनके मन में आया कि क्यों न यहां पर पौधे लगाए जाएं, ताकि यहां आने वाले मरीजों को छाया मिले और देखने में भी परिसर अच्छा लगे। शुरू में जामुन, बरगद, पीपल व अन्य तरह के पौधे लगाए। ये पौधे जीवित नहीं रह सके। दो बार मेहनत बेकार गई। रमेश चंद्र ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने गोबर की खाद से इन पौधों को बच्चों की तरह पाला। धीरे-धीरे और भी पौधे लगाए। पास में ही गांव होने के कारण देखभाल करते रहते थे।ये हैं प्रजातियां : अब परिसर में जामुन, नीम, आम, अमरूद, नीबू के अलावा अन्य तरह के पौधे लगे हुए हैं। इसके अलावा फुलवारी भी लगा रखी है। बरगद के पेड़ भी लगे हुए हैं। अस्पताल के मुख्य द्वार पर लगे पेड़-पौधे अस्पताल के भवन को और आकर्षक बनाते हैं। परिसर के अंदर भी हरियाली है।औषधीय पौधे भी लहलहा रहे : पीएचसी परिसर में पत्थर चटा पथरी के लिए, सदाबहार लाल व सफेद फूल ब्लड प्रेशर के लिए, सद्दासन कान दर्द सही करने के काम आने वाले औषधि के पौधे भी लगा रखे हैं।पशु-पक्षियों की शरणगाह : यहां पर लगे पेड़ पौधे पशु-पक्षियों को आकर्षित करते हैं। छांव में बंदर दिन भर पेड़ों के बीच रहकर उछल-कूद करते रहते हैं। जो फल होते हैं उन्हें खा जाते है। टहनियां तोड़कर नुकसान भी पहुंचाते हैं। पक्षियों की चहचाहट भी आकर्षित करती है। फूलों पर तितलियां मंडराती नजर आती हैं।वर्जनशुरू में जब मैंने यहां पौधे लगाए तो काफी परेशानियां रहीं। पौधे सूख जाते थे लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। इस परिसर को हरा-भरा बना दिया। आज देखकर मन को प्रसन्नता होती है।रमेशचंद्र, टोड़, सासनीशॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप


Source: Dainik Jagran June 27, 2021 21:22 UTC



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