सूरजपुर-सुखोमाजरी बाइपास के लिए हरियाणा सरकार द्वारा लेबर काॅलोनी के सैकड़ों घरों को पिला पंजा चलाकर उजाड़ दिया गया था, जिसके विरोध में प्रभावित मकान मालिकों ने विजय बंसल पूर्व चेयरमैन हरियाणा सरकार के मार्गदर्शन में पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को दस्ती नोटिस करते हुए 5 मार्च को पेश होने के आदेश दिए है।पूर्व पार्षद सीमा देवी, पूर्व सरपंच योगेंद्र ठाकुर, भीमसेन, सतपाल, राम अवतार, रमेश, टुकी राम, जय सिंह आदि ने इस पर खुशी जताते हुए बंसल के प्रयासों की सराहना की। लोगों ने कहा कि उनके साथ बंसल का साथ वर्षों से है और हर समय उनकी आवाज उठाते रहते हैं। इसके साथ-साथ बंसल ने आश्वस्त किया कि सरकार की हर जनविरोधी नीति का पुरजोर विरोध करते रहेंगे।याचिका में प्रभावित मकान मालिकों ने काॅलोनी को कानूनन गलत ढंग से तोड़ने का आरोप लगाया। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार यदि सरकार, सरकारी भूमि पर वर्षों से बसे मकान व काॅलोनी आदि को विस्थापित करती है तो विस्थापित करने से पूर्व 10 किमी के दायरे में पुन:निवास नीति के तहत मकान आशियाना आदि प्रदान करने आवश्यक है। जैसे पंचकूला में हुड्डा की भूमि और बसी हुई काॅलोनियों जैसे मद्रासी, राजीव,आजाद कालोनी आदि को विस्थापित करने से पूर्व आशियाना फ्लैट्स दिए गए थे। 2007 में बाइपास के लिए इन लोगों के मकानों की जमीन आपातकालीन धारा लगाकर इनकी जमीन अधिग्रहण की गई थी जबकि निर्माण कार्य 2017 मे शुरू हुआ, हरियाणा सरकार 12 साल में सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार इनके लिए आवास बनाने में असफल रही।मकान तोड़ने के मामले में सरकार को हाईकोर्ट की ओर से दिए आदेशों की लोगों को जानकारी देते बंसलतोड़ने के बाद अभी तक लोगों के सिर ढकने के छत नसीब नहीं हो पाई है। सैकड़ों लोगों को झोपड़ियों में रहना पड़ रहा है। पक्के मकान तोड़ने के बाद लोग पुनर्वास की मांग कर रहे थे, लेकिन आश्वासन के सिवाए इन्हें कुछ नहीं मिला। लोगों के अनुसार काॅलोनी वासी यहां 70 वर्षों से रह रहे हैं तथा क्षेत्र के विकास में योगदान है। साथ ही सरकार ने भी करोड़ों रुपए खर्च करके पीने का पानी, सामुदायिक केंद्र, सड़कें, गलियां, बिजली के मीटर, धर्मशाला, स्कूल आदि मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई हुई है। 1975 से बिजली के मीटर लगे हुए है। ग्राम पंचायत सूरजपुर ने प्रस्ताव पास करके गरीबों को 2-2 बिस्वा के प्लाट दिए हुए हैं जहां लोगों ने मकान बनाए हुए हैं, जबकि इनके वोटर, आधार कार्ड आदि बने हुए है तथा सामान्य चुनावों में अपने मतदान का प्रयोग करते हैं।
Source: Dainik Bhaskar February 06, 2019 20:48 UTC