रॉयटर, वाशिंगटन। कूटनीति के जरिये विश्व में होने वाले युद्धों और टकरावों को रोकने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शांति परिषद (बोर्ड ऑफ पीस) बनाने की घोषणा सितंबर 2025 में गाजा में युद्धविराम के लिए 20 सूत्री योजना को सार्वजनिक करते हुए की थी। लेकिन इस घोषणा को अब अमल में लाया जा रहा है।संकेत है कि ट्रंप की यह शांति संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद की तरह कार्य करेगी। इस परिषद में सदस्य बनने वाले देश का कार्यकाल तीन वर्षों का होगा। जो सदस्य देश परिषद की गतिविधियों के लिए इन तीन वर्षों में प्रत्येक वर्ष एक-एक अरब डॉलर का अंशदान करेगा उसे परिषद की स्थायी सदस्यता दी जाएगी।शांति परिषद की पूरी नियमावली अभी सार्वजनिक नहीं हुई है लेकिन अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि इस परिषद को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तरह संचालित करने की ट्रंप की योजना है।कूटनीतिज्ञों का मानना है कि शांति परिषद विश्व में संयुक्त राष्ट्र के प्रभाव को कम करेगी। यह परिषद ट्रंप की गाजा के लिए 20 सूत्री शांति योजना का भी संचालन करेगी।इन 20 सूत्रों में गाजा में अंतरराष्ट्रीय शांति सेना की तैनाती, वहां पर हमास से हथियार लेना, गाजा को आतंक मुक्त क्षेत्र बनाना और इजरायली हमले से गाजा में हुई बर्बादी को दूर कर पुनर्निर्माण करना शामिल है।शांति परिषद की कार्यकारी समिति में अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, अमेरिकी दूत स्टीव विटकाफ, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा, न्यूयार्क के कारोबारी मार्क रोवन और अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार राबर्ट ग्रैबिएल नामित किए गए हैं।
Source: Dainik Jagran January 22, 2026 01:50 UTC