रिटा. SP के अंतिम संस्कार के बाद श्रद्धाजंलि सभा में बेटे ने पढ़ी वसीयत, एक-एक बात सुनकर वहां खड़ा हर शख्स कहने लगा- गजब कर गए अंसारी साहब - News Summed Up

रिटा. SP के अंतिम संस्कार के बाद श्रद्धाजंलि सभा में बेटे ने पढ़ी वसीयत, एक-एक बात सुनकर वहां खड़ा हर शख्स कहने लगा- गजब कर गए अंसारी साहब


मुंगावली (अशोकनगर/मप्र प्रदेश). अभी तक आपने ऐसी वसीयतें देखी होंगी जिनमें उनकी संपत्ति बेटे बेटियों और सगे संबंधियों के बीच बांटी जाती है लेकिन शहर की माटी में जन्मे सेवा निवृत्त एसपी ने निधन से पहले अपनी जो वसीयत लिखी उसके लिए वे हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे।मौत के बाद भी हर जुबां पर अपना नाम छोड़ गए अंसारी...सोमवार को उनके निधन पर शोक श्रद्धांजलि सभा के दौरान जब उनके बेटे ने अपने पिता की वसीयत पढ़ी तो वहां मौजूद हर एक शख्स उनकी प्रशंसा किए बगैर नहीं रह सका। हर शख्स ने कहा- मरने के बाद भी आप गजब कर गए अंसारी साहब। मुंगावली निवासी अब्दुल खालिक अंसारी जो 1994 में सीआईडी ऑफिस से रिटायर एसपी थे, उनका निधन 30 जनवरी को भोपाल में हो गया। सोमवार को जब शहर में उनके निधन पर सन्टॉप हाईस्कूल पुराना बाजार में शोकसभा का आयोजन किया गया तो वहां उनके बेटे एके अंसारी एडवोकेट ने बार एसोसिएशन के सदस्य और गणमान्य नागरिकों के सामने अपने पिता की वसीयत पढ़ी। इस वसीयत में उन्होंने बेटे-बेटियों को जहां 50-50 पेड़ लगाकर पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए कहा। वहीं जिस मोहल्ले में वे रहते थे, उसके चारों तरफ अलग-अलग धर्मों के धार्मिक स्थलों को भी राशि देने के लिए कहा गया है।50-50 पेड़ लगाने को कहा...उन्होंने अपनी वसीयत मे लिखा- मेरे घर के चारों तरफ धार्मिक स्थान है जिनमें जामा मस्जिद, जैन मंदिर, कृष्णा मंदिर, है। मैं चाहता हूं कि मुंगावली में ऐसा कार्य किया जाए जिससे सभी धर्मों एवं समाज के लोग मुझे हमेशा याद रखें। इसलिए मैं अपने बेटे अब्दुल करीम अंसारी और सभी 6 बेटे-बेटियों से गुजारिश करता हूं कि वह 50 -50 पेड़ लगाएं।हर धर्म के लिए कुछ न कुछ देकर गए...इसके अलावा उन्होंने डिफ्टी मस्जिद जो उनके घर से सटी है, उसको 1 लाख, बार एसोसिएशन को किताब खरीदने 10 हजार, जामा मस्जिद को 10 हजार, जैन मंदिर को 5 हजार, कृष्ण मंदिर को 5 हजार, पुरानी तहसील दरगाह को 5 हजार, देवी मंदिर पर पानी व्यवस्था के लिए 5 हजार, गुरुद्वारा के लिए 5 हजार रुपए देने को कहा है। वहीं जिस मिडिल स्कूल में उन्होंने पढ़ाई की उस स्कूल को 10 हजार रुपए देने की बात वसीयत में लिखी है।


Source: Dainik Bhaskar February 05, 2019 11:15 UTC



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