Hindi NewsLocalRajasthanJodhpurNursing Workers Who Came Under Suspicion Said, Some Doctors Had Taken Injections Home To Treat Their RelativesAds से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐपरेमडेसिवीर इंजेक्शन घोटाला: संदेह के घेरे में आए नर्सिंगकर्मियों ने कहा, कुछ डॉक्टर अपने परिजनों का इलाज करने घर ले गए थे इंजेक्शनजोधपुर 11 घंटे पहलेकॉपी लिंकजोधपुर में रेमडेसिवीर इंजेक्शन घोटाला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में संदिग्ध बताए जा रहे नर्सिंगकर्मियों ने आज डॉक्टरों की पोल खोलकर रख दी। रेमडेसिवीर इंजेक्शन घोटाले में अब कुछ डॉतक्टरों के नाम सामने आने से मेडिकल कॉलेज में हड़कंप मचा हु्आ है। नर्सिंगकर्मियों का आरोप है कि डॉक्टरों ने अपने परिजनों का घर या प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराया। उन्हें रेमडेसिवीर इंजेक्शन लगाने के लिए अस्पताल में फर्जी तरीके से मरीजों को भर्ती होना दर्शा इंजेक्शन आवंटित करवा लिए। इस मामले में अब जिम्मेदार चुप्पी साध बैठे है।जोधपुर संभाग के सबसे बड़े एमडीएम अस्पताल में 250 से 300 रेमडेसिवीर इंजेक्शन घोटाला सामने आने के बाद आज दिनभर मेडिकल कॉलेज में गहमागहमी का माहौल रहा। लगातार मीटिंगों का दौर चलता रहा। इस मामले में जांच कमेटी की ओर से संदिग्ध माने गए 13 नर्सिंगकर्मियों ने आज अस्पताल अधीक्षक व प्रिंसिपल के समक्ष अपना पक्ष रखा। शाम तक इसे लेकर अनिश्चितता बनी रही और मामले को दबाने का प्रयास चलता रहा। आखिरकार रात को घोटाले का बुलबुला फट गया और इसमें कुछ डॉक्टरों के नाम सामने आ गए।यह कहना है नर्सिंगकर्मियों कासंदिग्ध बताए जा रहे 13 नर्सिंग कर्मियों की ओर से अस्पताल अधीक्षक को सौंपे गए पत्र में कहा गया कि हमें इस मामले में झूठा बदनाम किया जा रहा है। किसी मरीज को भर्ती करना हमारे हाथ में ही नहीं है। डॉक्टरों का हस्ताक्षर करने के बाद ही मरीज भर्ती हो पाता है। जांच कमेटी ने कभी भी हमारे बयान तक दर्ज नहीं किए। डमी मरीजों के बारे में हमें भी पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने पत्र में एक फार्मासिस्ट श्याम प्रजापत की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उनका आरोप है कि अधिकांश इंजेक्शन इसी ने जारी किए।डॉक्टरों ने घर पर अपने परिजनों के लगाए इंजेक्शननर्सिंगकर्मियों का आरोप है कि जब शहर में रेमडेसिवीर इंजेक्शनों की मारामारी मची हुई थी, उस दौर में कुछ डॉक्टर अपने कोरोना संक्रमित परिजनों के इलाज के लिए अस्पताल से रेमडेसिवीर इंजेक्शन अस्पताल से लेकर गए। उनका आरोप है कि स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. बीएस जोधा अपने परिजनों के लिए, बच्चा रोग विशेषज्ञ डॉ. जेपी सोनी अपनी साली व साढू के लिए, रेजिडेंट डॉक्टर सतवीर व सुरेन्द्र भी इंजेक्शन अपने घर लेकर गए। जबकि एक अन्य रेजिडेंट डॉ. आर के देवड़ा के परिजनों के लिए इंजेक्शन लेकर गए।लोग भटक रहे थे इंजेक्शनों के लिएअप्रैल के अंत से मई के पहले पखवाड़े तक जोधपुर में कोरोना चरम पर था। उस समय अस्पतालों में नो बेड की स्थिति बनी हुई थी। ऐसे में रेमडेसिवीर इंजेक्शनों की मांग भी बहुत अधिक बढ़ गई। बाजार में इनके उपलब्ध नहीं होने के कारण कालाबाजारी बढ़ गई। लोग अपने परिजनों की जान बचाने के लिए इन्हें किसी भी दाम पर हासिल करने को भटक रहे थे। ब्लैक में ये इंजेक्शन 30 से 50 हजार रुपए तक में बेचे गए। ऐसे में 230 से 300 रेमडेसिवीर इंजेक्शन का गायब होना बहुत बड़ा घोटाला माना जा रहा है।
Source: Dainik Bhaskar May 30, 2021 16:41 UTC