04:27 AM 30 मार्च 2026कॉपी लिंककेरल चुनाव: युवाओं में वोटिंग को लेकर उलझनकेरल में 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कई युवा वोटर्स असमंजस में हैं। कुछ युवाओं को लगता है कि वोट देने से कोई फर्क नहीं पड़ता, जबकि कुछ यह तय नहीं कर पा रहे कि किसे वोट दें।कोल्लम के 23 साल के छात्र आर्चित का कहना है कि उन्हें वोट देने का कोई मतलब नहीं दिखता। उनका मानना है कि सभी पार्टियां अपने फायदे के लिए काम करती हैं, इसलिए वे NOTA (किसी को नहीं) का विकल्प चुन सकते हैं।वहीं, तिरुवनंतपुरम की 20 साल की छात्रा श्रेया वोट तो देना चाहती हैं, लेकिन यह तय नहीं कर पा रही हैं कि किस उम्मीदवार को चुनें। उनका कहना है कि किसी को वोट देने पर भी वह पार्टी के हिसाब से ही काम करेगा।कोच्चि के एक वकील अस्विन उन्नी भी इसी दुविधा में हैं। उन्हें एक उम्मीदवार पसंद है, लेकिन उसकी पार्टी की राजनीति से सहमत नहीं हैं। ऐसे में वे भी NOTA पर विचार कर रहे हैं।युवा संगठनों का कहना है कि रोजगार के कम मौके, अच्छी शिक्षा की कमी और पारंपरिक राजनीति से दूरी की भावना युवाओं को प्रभावित कर रही है। कई युवा पढ़ाई और नौकरी के लिए विदेश जा रहे हैं, जिससे वोटिंग में उनकी भागीदारी भी कम हो रही है।चुनाव आयोग ने युवाओं को जागरूक करने के लिए ‘My Vote, My Strength’ अभियान शुरू किया है। इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा युवाओं को मतदान के लिए प्रेरित करना है।यह अभियान केरल स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (KeLSA) और पुलिस के साथ मिलकर चलाया जा रहा है, ताकि हर नागरिक अपने वोट की अहमियत समझे और उसका सही इस्तेमाल करे।
Source: Dainik Bhaskar March 30, 2026 07:10 UTC