स्कूलों की फीस के अलावा अन्य शुल्क को माफ करने के लिए पालक संघ ने सीएम को पत्र लिखादैनिक भास्कर Apr 18, 2020, 05:34 PM ISTइंदौर. कोरोना के कारण लगभग एक महीने से ज्यादा समय से स्कूल बंद हो चुके हैं। ऐसे में कुछ स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई कराए जाने की जुगाड़ तो कर ली है, लेकिन पालकों को पहली तिमाही की फीस को लेकर चिंता सता रही है। ऐसे में पालक संगठन ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मांग की है कि पालकाें के हित में सरकार निर्णय लेते हुए इस तिमाही फीस में 50 प्रतिशत की राहत प्रदान करे। साथ ही शिक्षण शुल्क के अलावा अन्य शुल्क को भी माफ किया जाए।इंदौर पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुरोध जैन ने बताया कि एक पत्र के माध्यम से प्रदेश के हजारों मध्यमवर्गीय व गरीब पालकों की ओर से निवेदन किया है कि कोरोना के लाॅकडाउन के चलते सभी शिक्षण संस्थान मार्च से बंद हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखकर लगता है कि जून-जुलाई से ही कक्षाएं संभवतः प्रारंभ हो सकेंगी। हालांकि कुछ ने जरूर ऑनलाइन क्लासेज के माध्यम से इसकी पूर्ति करने का प्रयास किया है। पालकों के सामने अब दोहरी समस्या है।प्रथम तो लाॅकडाउन के चलते विगत 2 माह से लोग अपना व्यापार- व्यवसाय/ काम बंद कर के बैठे हैं और भविष्य भी अनिश्चित है। दूसरा शिक्षण संस्थाओं की प्रथम तिमाही मार्च-मई की फीस भरने कि देय दिनांक भी नजदीक आ रही है। पालक संघ यह मांग करता है कि शिक्षण शुल्क को छोड़ सभी शुल्क पूर्ण रूप से माफ होने चाहिए। शिक्षण शुल्क में भी 50% तक रियायत मिले। शिक्षण संस्थाएं फीस भरने के लिए बाध्य न करें व लाॅकडाउन खुलने के 3 महीने आगे तक पालकों को यह फीस भरने की सुविधा हो। जिन स्कूलों द्वारा फरवरी के महीने में फीस ले ली गई है, उन्हें अगले तिमाही में एडजस्ट करें।शिक्षण संस्थाओं द्वारा टीचर्स की सैलरी में कोई कटौती नहीं होनी चाहिए। हाल ही में दिल्ली व अन्य सरकारों ने यह जन हितैषी निर्णय लेकर हजारों गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत दी है। लॉकडाउन के चलते गरीब व मध्यमवर्गीय परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। क्योंकि आय के स्त्रोत बंद हो चुके हैं और सरकार से कोई अन्य आर्थिक राहत मिलते दिखाई नहीं दे रही है। अतः निवेदन है कि यह जन हितैषी निर्णय लेकर गरीब व मध्यमवर्गीय परिवार को आर्थिक व मानसिक कष्ट से बचाएं।
Source: Dainik Bhaskar April 18, 2020 12:11 UTC