14 वर्ष के बदलाव और वनवास के अतीत के किस्से याद आने पर हम गौरव महसूस करते हैं।- प्रकाश दुबे समूह संपादक, दैनिक भास्कर prakashdube01@gmail.comचौदह साल पुराना प्रसंग ही याद कर लें। स्पेन के बुरलाडा में साल 2012 के दिसंबर महीने में क्रास कंट्री रेस हुई। दौड़ में सबसे आगे कीनियाई एवेल मुताई थे। फिनिश लाइन से कुछ कदम पहले वे रुके। उन्हें भ्रम हुआ कि फिनिश लाइन पार कर ली है। उनके ठीक पीछे स्पेन के धावक इवान फर्नांडिस थे। इवान ने एवेल को फिनिश लाइन की तरफ धकेला। एवेन नहीं समझे। अंगुली का संकेत कर इवान ने फिर धक्का दिया। एवेल का अव्वल नंबर कायम रहा। स्वर्ण पदक विजेता बने। खिसियाये दर्शकों ने इवान से जवाब मांगा। इवान बोले-वह जीत, मेरी नहीं होती। ऐसा पदक लेकर मां को क्या मुंह दिखाता? मातृभूमि और मां को अपने बेटे पर गर्व हुआ। अब पूरी दुनिया इवान को गर्व से याद करती है। हुनर को काइयांपन की वर्दी में छुपाकर यशस्वी होने वाला मानवता में पिछड़ता है।नहीं छुपाई। उन्होंने फोन कर सत्ता में सहभागी दल के मुखिया से खुलकर अपनी असहमति जताई।
Source: Dainik Bhaskar January 08, 2026 06:44 UTC