10 साल की उम्र से अपराध… 20 की उम्र में गैंगस्टर, मुठभेड़ में ढेर: ‘मोंटी चड्ढा’ का खौफनाक अंत - News Summed Up

10 साल की उम्र से अपराध… 20 की उम्र में गैंगस्टर, मुठभेड़ में ढेर: ‘मोंटी चड्ढा’ का खौफनाक अंत


नहीं मिल पाई मां की परवरिश, उधम सिंह गैंग ने दिया मोंटी चड्ढा को बड़ा नाममुरादाबाद : कांठ रोड स्थित रामगंगा विहार के ग्रीन विला में रहने वाले बड़े निर्यातक अरशु ढल से 5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने और दहशत फैलाने के लिए ताबड़तोड़ फायरिंग करने वाला कुख्यात बदमाश आशु उर्फ मोंटी चड्ढा आखिरकार पुलिस मुठभेड़ में ढेर हो गया। एक ऐसा अपराधी, जिसकी कहानी बचपन की लापरवाही से शुरू होकर गैंगस्टर बनने तक पहुंची, उसका अंत भी उसी हिंसक रास्ते पर हुआ, जिसे उसने खुद चुना था।गाजियाबाद के हापुड़ थाना क्षेत्र के गांव हफीजपुर निवासी मोंटी चड्ढा का अपराध की दुनिया में प्रवेश बेहद कम उम्र में हो गया था। परिजनों के अनुसार, जब वह महज दो साल का था, तभी उसकी मां का निधन हो गया था। मां की ममता से दूर और परिवार की अनदेखी के बीच पला-बढ़ा मोंटी धीरे-धीरे गलत संगत में पड़ गया।बताया जाता है कि 10 साल की उम्र में ही उसने छोटी-मोटी आपराधिक घटनाओं को अंजाम देना शुरू कर दिया था। शुरुआत में परिवार ने उसकी हरकतों को नजरअंदाज किया। पिता अक्सर यह कहकर टाल देते थे कि “अभी बच्चा है, समय आने पर सुधर जाएगा।” लेकिन यही लापरवाही आगे चलकर एक खतरनाक अपराधी को जन्म दे गई।जैसे-जैसे उम्र बढ़ी, मोंटी का अपराध भी बढ़ता गया। चोरी, लूट और अन्य वारदातों में शामिल होते-होते वह पुलिस के रडार पर आ गया। 20 साल की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते वह कई बार गिरफ्तार होकर जेल भी जा चुका था। पुलिस का शिकंजा कसता देख उसने अपराध की दुनिया में बड़ा नाम बनाने का फैसला किया और कुख्यात उधम सिंह गैंग का दामन थाम लिया।गैंग में शामिल होते ही मोंटी का नाम तेजी से उभरने लगा। इसी गैंग के इशारे पर उसने अपने साथियों के साथ मिलकर मुरादाबाद के बड़े निर्यातक अरशु ढल से 5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी। रंगदारी मांगने के बाद बदमाशों ने बेखौफ होकर एक्सपोर्ट फर्म के गेट पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इस हमले में वहां तैनात सिक्योरिटी गार्ड बाल-बाल बच गया, लेकिन इलाके में दहशत फैल गई।घटना को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी सतपाल अंतिल ने तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए। एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की कई टीमें मोंटी की तलाश में जुट गईं। लगातार दबाव के चलते मोंटी फरार हो गया, लेकिन पुलिस की घेराबंदी से वह ज्यादा दिन तक बच नहीं सका।कल देर रात चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस और मोंटी के बीच मुठभेड़ हो गई। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने उसे ढेर कर दिया। एक खौफनाक अपराधी का अंत उसी हिंसा के बीच हुआ, जिसे उसने अपना रास्ता बनाया था।मुठभेड़ के बाद मोंटी का शव मुरादाबाद पोस्टमार्टम हाउस लाया गया, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। आशंका थी कि शव लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच सकते हैं, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि केवल उसका बड़ा भाई और एक दोस्त ही शव लेने पहुंचे।इस दौरान एसपी सिटी कुमार रणविजय, एएसपी और सिविल लाइंस थाना प्रभारी मनीष सक्सेना भारी पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रहे। लेकिन भीड़ न आने पर पुलिस फोर्स को वापस थानों में भेज दिया गया।मोंटी चड्ढा की कहानी एक सख्त चेतावनी है लापरवाही और गलत संगत कैसे एक मासूम बच्चे को खतरनाक अपराधी बना देती है, और अंत में उसका अंजाम सिर्फ मौत ही होता है।


Source: Dainik Bhaskar April 02, 2026 10:02 UTC



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