डिजिटल डेस्क,भोपाल। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री जयंत मलैया ने ध्यानाकर्षण के दौरान दमोह में सीतानगर मध्य सिंचाई परियोजना में 100 करोड़ की राशि नहीं खर्च होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा 2018 में परियोजना में 518.09 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए थे। पथरिया तहसील के 22 गांव, दमोह तहसील के 62 गांव कुल 84 गांव में 16200 हेक्टेयर में प्रेशराइज्ड पाईप लाइन नहर प्रणाली से सिंचाई प्रस्तावित हुई।मूल डीपीआर 2018 में बनी और इसे 2023 में पूरा किया जाना था। मूल डीपीआर में अधिकारियों ने बदलाव कर दमोह के 62 गांव में से 33 को परियोजना से बाहर कर दिया। सिंचाई का रकवा 9180 कर दिया। पथरिया में भी रकवा 4800 की जगह 702 हेक्टेयर कर दिया। पथरिया में 2220 हेक्टेयर रकबा बढ़ा पर गांवों की संख्या नहीं बढ़ी।निर्माण एजेंसी और विभाग के अधिकारियों ने भ्रष्टाचार करने की नीयत से मूल डीपीआर को बदला। 33 गांवों को सिंचाई का लाभ नहीं मिला। 27 जनवरी को किसानों ने आंदोलन भी किया। इसके जवाब में जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा डीपीआर में 518.09 करोड़ से 57 गांवों की 16200 हेक्टेयर सिंचाई स्वीकृत थी। इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।दमोह विधानसभा के 33 गांव 12000 हेक्टेयर सिंचाई के लिए प्रस्तावित हैं। जयंत मलैया ने ये भी कहा कि मुख्यमंत्री ने अन्य गांवों को भी पानी देने की घोषणा की है। 600 करोड़ रुपए से पानी ब्यामरा नदी से लिफ्ट करके सेमरकोट तालाब भरेंगे। केन-बेतवा परियोजना में ब्यामपा नदी पर कार्य होना है। दमोह ब्लाक के 36 और 66 गांवों को जोड़कर 99 गांवों को जोड़ा जाए। मंत्री सिलावट ने 33 गांवों को जोड़ने की बात कही।
Source: Dainik Bhaskar February 18, 2026 13:32 UTC