दिसंबर, 2018 में खुदरा मुद्रास्फीति 18 माह के न्यूनतम स्तर 2.2 प्रतिशत रह गई। रिजर्व बैंक ने अगले वित्त वर्ष के लिये इसके अनुमान को कम किया है। उसका मानना है कि चालू वित्त वर्ष के मार्च में समाप्त होने वाली तिमाही में यह कम होकर 2.8 प्रतिशत रह जायेगी जबकि अगले वित्त वर्ष की पहली छमाही में इसके 3.2 से 3.4 प्रतिशत और तीसरी तिमाही में 3.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है। मौद्रिक नीति समिति ने अपने निष्कर्ष में कहा है कि ‘‘ निकट अवधि में मुद्रास्फीति की मुख्य दर नरम बने रहने का अनुमान किया गया है। ‘‘मुद्रास्फीति का वर्तमान स्तर नीचे है और खाद्य मुद्रास्फीति भी शांत है।’’ समिति ने कहा है कि ‘‘सब्जियों और तेल की कीमतों, वैश्विक व्यापार में तनावों, स्वास्थ्य एवं शिक्षा के महंगा होने, वित्तीय बाजारों में उतार चढ़ाव और मानूसन की स्थिति के प्रति हमें सजग रहना होगा।’’ समिति के प्रस्ताव में कहा गया है कि ‘नीतिगत ब्याज में यह कटौती आर्थिक वृद्धि में सहायक होने के साथ साथ मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत पर सीमित रखने के मध्यावधिक लक्ष्य के अनुकूल है।’’ मौद्रिक समिति में डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य और सदस्य चेतन घाटे ने रेपो को 6.5 प्रतिशत पर ही बनाए रखने का पक्ष लिया। लेकिन गवर्नर दास और तीन अन्य सदस्यों ने इसमें कमी के प्रस्ताव के पक्ष में सहमति जताई।
Source: Navbharat Times February 07, 2019 07:41 UTC