Dehradun News: पेरेंट्स पर भारी, सिस्टम की लाचारी - News Summed Up

Dehradun News: पेरेंट्स पर भारी, सिस्टम की लाचारी


देहरादून, ब्यूरो: स्कूलों में न्यू एजुकेशनल सेशन शुरू हो चुका है। इसे लेकर स्कूली बच्चों में तो उत्साह है। लेकिन बुक्स, यूनिफॉर्म, स्कूल वैन, एडमिशन फीस को लेकर पेरेंट्स बहुत चिंतित हैं। प्राइवेट स्कूलों के खर्चे का दबाव पेरेंट्स पर बढ़ता जा रहा है। बढ़ी हुई स्कूल फीस से लेकर रि-एडमिशन फीस और तमाम तरह के और चार्ज पेरेंट्स के बजट पर भारी पड़ रहे हैं। हालांकि, प्राइवेट स्कूलों की इस मनमानी पर लगाम कसने के लिए विभागीय स्तर पर कंप्लेन के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है, लेकिन यह सिर्फ फॉर्मेलिटी तक सीमित है। विभाग का तर्क है कि प्राइवेट स्कूलों के लिए कोई रेगुलेटरी एक्ट न होने के कारण प्रॉपर एक्शन लेने में दिक्कत आती है। पेरेंट्स की डिमांड है कि जल्द से जल्द सख्त कानून बनाकर प्राइवेट स्कूलों की मनमानी रोकी जाए।फीस एक्ट किया जाए तैयारडालनवाला निवासी एक पेरेंट के अनुसार भविष्य के लिए अभिभावक संघ, मीडिया, जन संगठनों को साथ लेकर पेरेंट्स के हित में सख्त फीस एक्ट बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही उत्तराखंड की शिक्षा नीति का ड्राफ्ट तैयार कर शिक्षा के मंदिरों को शिक्षा माफिया के हाथ से वापिस ले लेना चाहिए। इसके साथ ही फीस एक्ट कानून जल्द तैयार कर उसे सख्ती से लागू करना चाहिए। पेरेंट्स की मांग है कि प्राइवेट स्कूलों की ओर से की गई मनमानी फीस वृद्धि तत्काल वापस ली जाए। इसके साथ ही सभी स्कूलों में एनसीईआरटी की बुक्स सख्ती से लागू होनी की जानी चाहिए।लगातार आ रहीं शिकायतेंस्कूलों की मनमानी को लेकर पिछले वर्षों तक जब पेरेंट्स ने लगातार मांग की तो शिक्षा विभाग की ओर से फॉर्मेलिटी के लिए एक शिकायत प्रकोष्ठ खोल दिया गया और हेल्पलाइन नंबर जारी कर दिए गए। लेकिन, यह कवायद बहुत प्रभावी नहीं रही। एजुकेशन सेशन शुरू होने के साथ ही इस बार भी हेल्पलाइन के जरिये लगातार पेरेंट्स की कंप्लेंस मिल रही हैं। इतना ही नहीं बाल आयोग को भी प्राइवेट स्कूलों से संबधित शिकायतें मिल रही हैं।फीस पेंडिंग तो नो एंट्रीएक ओर जहां पेरेंट्स अलग-अलग माध्यम से अपनी बात रखने का प्रयास कर रहे हैं तो इसका सीधा असर बच्चों पर पड़ रहा है। शिमला बाईपास स्थित एक स्कूल के संबंध में पेरेंट्स की शिकायत है कि जब उनकी ओर से फीस बढ़ोत्तरी समेत महंगी बुक्स को लेकर विरोध जताया गया तो उनके बच्चे के साथ स्कूल के टीचर्स की ओर से लगातार बदसलूकी की जा रही है। जबकि, उसी स्कूल में कुछ पेरेंट्स ऐसे भी हैं जिनके बच्चों की एक माह की फीस न देने पर बच्चे का रिजल्ट ही जारी नहीं किया गया है। स्कूल फीस जमा न होने तक स्कूल में बच्चे की नो एंट्री कर दी गई।5 से 6 गुना महंगी बुक्सरायपुर निवासी एक पेरेंट के अनुसार राज्य के निर्माण के 25 वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक राज्य के पास प्राइवेट स्कूलों की लूट पर लगाम लगाने के लिए सख्त फीस एक्ट और शिक्षा नीति नहीं है। सरकार की लापरवाही या शह से प्राइवेट स्कूल हर वर्ष मनमानी फीस और तरह तरह के शुल्क ले रहे हैं, जिससे पेरेंट्स का शोषण कर हो रहा है। उत्तराखंड मे एनसीईआरटी के अतिरिक्त अन्य प्राइवेट प्रकाशकों की किताबें स्कूलों में लगाना प्रतिबंधित होने के बावजूद भी धड़ल्ले से ये काम चल रहा है। 100 रुपये वाली किताब 5 से 6 सौ तक बेची जा रही है। हर वर्ष सिलेबस बदलकर नई किताबें लाने को पेरेंट्स को मजबूर किया जा रहा है। प्राइवेट स्कूलों के नाम से छपी हुई नोट बुक्स, बुक कवर, बैग भी दोगुनी कीमतों पर बेचे जा रहे हैं। एक हजार वाली यूनिफॉर्म 3 से 5 हजार तक मिल रही हैं।इन हरकतों से पेरेंट्स पेरशान- मनमाने तरीके से प्राइवेट स्कूल हर साल बढ़ा रहे फीस।- रि-एडमिशन के नाम पर वसूली जा रही मोटी रकम।- हर साल बदल दी जा रहीं बुक्स, बढ़ रही कीमतें।- सिलेबस वही बदला जा रहा बुक्स का कवर और कीमत।- स्कूल वैन और बस की फीस में भी मनमाने तरीके से इजाफा।हमारे पास किसी भी तरह की शिकायत मिल रही है तो इस पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है। थोड़ी तकनीकी दिक्कत होने के कारण शिक्षा विभाग बाध्य है। हालांकि समय-समय पर बोर्ड को इसकी जानकारी दी जाती है। जिसके बाद वे एक्शन लेते हैं।dehradun@inext.co.in


Source: Dainik Jagran April 09, 2026 18:32 UTC



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