क्लेम के पैसों का भुगतान एकमुश्त EDLI स्कीम में क्लेम के पैसों का भुगतान एकमुश्त होता है। EDLI में इंप्लॉई को कोई रकम नहीं देनी होती है। इसमें केवल कंपनी की ओर से योगदान होता है। अगर स्कीम के तहत कोई नॉमिनेशन नहीं हुआ है तो कवरेज के मृत कर्मचारी का जीवनसाथी, कुंवारी बच्चियां और नाबालिग बेटा/बेटे लाभार्थी होंगे। मरने वाला मेंबर इंप्लॉई EPF का एक्टिव कॉन्ट्रीब्यूटर होना चाहिए, यानी उसकी मौत के वक्त तक उसकी ओर से पीएफ में योगदान जारी होना चाहिए।न्यूनतम बीमा राशि कितनी हुई सीबीटी ने 14 फरवरी 2020 के बाद न्यूनतम बीमा राशि 2.5 लाख रुपये बरकरार रखने का भी निर्णय किया था, जो 15 फरवरी 2020 से लागू हो गई है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 28 अप्रैल को ईडीएलआई योजना के तहत अधिकतम बीमा राशि बढ़ाकर 7 लाख रुपये करने के फैसले को लागू करने के लिए अधिसूचना जारी की थी। अधिसूचना की तारीख से ही यह बढ़ी हुई लिमिट लागू हो गई है।कंपनी की ओर से कितना योगदान ऑर्गेनाइज्ड सेक्टर में काम करने वाले कर्मचारियों की बेसिक सैलरी+DA का 12 फीसदी इंप्लॉई प्रोविडेंट फंड EPF में जाता है। 12 फीसदी का ही योगदान कंपनी/नियोक्ता की ओर से भी होता है लेकिन नियोक्ता के 12 फीसदी योगदान में से 8.33 फीसदी इंप्लॉई पेंशन स्कीम EPS में चला जाता है और बाकी EPF में। लेकिन, नियोक्ता की ओर से योगदान यहीं तक सीमित नहीं होता है। EDLI स्कीम में केवल कंपनी की ओर से प्रीमियम जमा होता है, जो कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 0.50 फीसदी होता है। हालांकि गौर करने वाली बात यह है कि अधिकतम बेसिक सैलरी लिमिट 15 हजार रुपये ही काउंट होगी, फिर चाहे कर्मचारी का वास्तविक बेसिक वेतन कितना ही ज्यादा क्यों न हो।क्लेम अमाउंट की कैलकुलेशन EDLI स्कीम में क्लेम की गणना कर्मचारी को मिली आखिरी 12 माह की बेसिक सैलरी+DA के आधार पर की जाती है। ताजा संशोधन के तहत अब इस इंश्योरेंस कवर का क्लेम आखिरी बेसिक सैलरी+DA का 35 गुना होगा, जो पहले 30 गुना होता था। साथ ही अब 1.75 लाख रुपये का मैक्सिमम बोनस रहेगा, जो पहले 1.50 लाख रुपये मैक्सिमम था। यह बोनस आखिरी 12 माह के दौरान एवरेज पीएफ बैलेंस का 50 फीसदी माना जाता है। उदाहरण के तौर पर आखिरी 12 माह की बेसिक सैलरी+DA अगर 15000 रुपये है तो इंश्योरेंस क्लेम (35 x 15,000) + 1,75,000= 7 लाख रुपये हुआ। यह मैक्सिमम क्लेम है।कैसे होगा बीमा राशि के लिए दावा? यदि EPF सब्सक्राइबर की असमय मौत हो जाती है तो उसके नॉमिनी या कानूनी उत्तराधिकारी इंश्योरेंस कवर के लिए क्लेम कर सकते हैं। क्लेम करने वाला माइनर यानी 18 साल से कम उम्र का है तो उसकी तरफ से उसका अभिभावक क्लेम कर सकता है। इसके लिए इंश्योरेंस कंपनी को इंप्लॉई की मृत्यु का प्रमाण पत्र, सक्सेशन सर्टिफिकेट, माइनर नॉमिनी की ओर से अभिभावक द्वारा दावा किए जाने पर गार्जियनशिप सर्टिफिकेट और बैंक डिटेल्स देने की जरूरत होगी। अगर PF खाते का कोई नॉमिनी नहीं है तो फिर कानूनी उत्तराधिकारी क्लेम कर सकता है।फॉर्म 5 IF की पड़ेगी जरूरत PF खाते से पैसा निकालने के लिए एंप्लॉयर के पास जमा होने वाले फॉर्म के साथ इंश्योरेंस कवर का फॉर्म 5 IF भी जमा करना होगा। इस फॉर्म को एंप्लॉयर सत्यापित करेगा। यदि नियोक्ता उपलब्ध नहीं है, तो फॉर्म को निम्नलिखित में से किसी एक द्वारा वैरीफाई किया जाना चाहिए: गजटेड अधिकारीमजिस्ट्रेटग्राम पंचायत के अध्यक्षनगरपालिका या जिला स्थानीय बोर्ड के अध्यक्ष / सचिव / सदस्यपोस्टमास्टर या सब पोस्टमास्टरसांसद या विधायकCBT या EPF की क्षेत्रीय समिति के सदस्यबैंक मैनेजर (उस बैंक का) जिसमें खाता रखा गया था एप्लीकेशन फॉर्म की अटेस्टेड कॉपी, सभी सहयोगी दस्तावेजों क साथ आयुक्त को सौंपनी होगी। उसके वेरिफाई करने के बाद क्लेम अमाउंट मिलेगा।
Source: Navbharat Times May 08, 2021 06:35 UTC