Guru Purnima गुरु पूर्णिमा 2021, 23 जुलाई को देश के बड़े भागों में मनाया जा रहा है। केवल पूर्वोत्तर भागों में 24 जुलाई को 3 मुहूर्त से अधिक पूर्णिमा तिथि होने की वजह से इन भागों में 24 जुलाई को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा। आषाढ़ पूर्णिमा जिसे व्यास पूर्णिमा और गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। भारत का एक ऐसा पर्व है जो दुनिया भर में भारत की गुरु परंपरा और गुरु को देवताओं के समकक्ष और उनसे भी श्रेष्ठ स्थान देने के महत्व को दर्शाता है।गुरु पूर्णिमा के दिन सभी लोग अपने-अपने गुरुओं और मेंटर के प्रति आभार प्रकट करते हुए उनकी पूजा करते हैं और उन्हें उपहार देते हैं। इस दिन गुरु के प्रति आभार व्यक्त करने और उनसे आशीर्वाद लेना बहुत ही शुभ माना जाता है। अगर आप भी इस अवसर पर गुरु का आशीर्वाद और उनकी कृपा पाना चाहते हैं तो इस विधि से गुरु की पूजा करें।गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान ध्यान करके भगवान विष्णु और शिवजी की पूजा करें। इसके बाद भगवान कृष्ण द्वैपायन महर्षि वेद व्यासजी की पूजा करें। महर्षि व्यासजी के नाम से ही गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। इसकी वजह यह है कि इन्होंने चारों वेदों को संकलित किया। इसके अलावा 18 पुराणों और महाभारत महाकाव्य की रचना की। इन्होंने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए गीता के ज्ञान का भी संकलन किया। इसलिए इन्हें प्रथम गुरु के रूप में माना जाता है और इन्हीं के नाम से गुरु पूर्णिमा का पर्व इनके जन्मदिवस आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाता है। इसलिए भगवान विष्णु और शिवजी के बाद इनकी पूजा का विधान शास्त्रों में बताया गया है।गुरु पूर्णिमा पर प्रथम गुरु वेदव्यासजी की रोचक जन्मकथा पढेंदेवताओं और व्यासजी की पूजा के बाद लौकिक गुरु की पूजा करनी चाहिए। अपने गुरु के चरण स्पर्श करें। गुरु के चरण धोएं। इसके बाद गुरु को तिलक लगाएं और फिर वस्त्र भेंट करें। गुरु की सेवा में मिठाई और फल भेंट करें। इसके बाद गुरु को जो भी उपहार देना चाहें भेंट कीजिए। गुरु से आशीर्वाद लीजिए।गुरु पूर्मिमा पर इस श्लोक से करें गुरु की प्रार्थनागुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरःगुरुः साक्षात्परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमःGuru Purnima Date Muhurat गुरु पूर्णिमा 23 या 24 जुलाई गुरु पूजन मुहूर्तसाल 2021 में गुरु पूर्णिमा की तिथि को लेकर कुछ उलझन की स्थिति है। ऐसे में निर्णय सिंधु नामक ज्योतिषीय पुस्तक का कहना है कि अगर अगले दिन पूर्णिमा तिथि तीन मुहूर्त से कम हो तब पहले दिन ही गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाना चाहिए। ऐसे में 23 जुलाई को 10 बजकर 44 मिनट पर चतुर्दशी तिथि के समाप्त होने के बाद से गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाना शास्त्र सम्मत होगा। पटना, वाराणसी, कटक में 24 जुलाई को गुरु पूर्णिमा मनाया जाना उचित होगा।
Source: Navbharat Times July 22, 2021 13:22 UTC