INS Taraigiri Navy Inducts BrahMos Missiles & Air Defence Systems - News Summed Up

INS Taraigiri Navy Inducts BrahMos Missiles & Air Defence Systems


Hindi NewsNationalINS Taraigiri Navy Inducts BrahMos Missiles & Air Defence SystemsINS तारागिरी नेवी में शामिल हुआ: यह ब्रह्मोस और एयर डिफेंस सिस्टम से लैस; राजनाथ बोले- सेना की ताकत बढ़ेगीनई दिल्ली 11 घंटे पहलेकॉपी लिंक‘तारागिरी’ इसी नाम के पुराने युद्धपोत का एडवांस्ड वर्जन है।INS तारागिरी शुक्रवार को विशाखापत्तनम में इंडियन नेवी में शामिल हुआ। डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह इस सेरेमनी में मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि जब भी कोई संकट आता है, चाहे वह रेस्क्यू ऑपरेशन हो या मानवीय सहायता देना हो। हमारी नेवी हमेशा सबसे आगे रहती है। INS तारागिरी की कमीशनिंग से हमारी नेवी की ताकत और बढ़ेगी।तारागिरी को मझगांव डॉक शिप बिल्डिंग लिमिटेड ने प्रोजेक्ट 17-ए के तहत तैयार किया है। वॉरशिप में ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल, एमएफस्टार(रडार), मीडियम रेंज सर्फेस टु एयर मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम लगा हुआ है।इसके अलावा यह 76 मिमी गन, 30 मिमी और 12.7 मिमी क्लोज-इन वेपन सिस्टम के साथ एंटी सबमरीन रॉकेट और टॉरपीडो से भी लैस है। वहीं भारत की स्वदेशी न्यूक्लियर सबमरीन 'अरिदमन' को भी नेवी में शामिल किया गया।यह नीलगिरि-क्लास का चौथा युद्धपोत हैभारत की नीलगिरी क्लास (Project 17A) में कुल 7 स्टील्थ फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। तारागिरी इस क्लास का चौथा युद्धपोत है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, प्रोजेक्ट 17-ए युद्धपोत को आगे आने वाली समुद्री चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है।‘तारागिरी’ उसी नाम के पुराने युद्धपोत का एडवांस्ड वर्जन है, जिसने 1980 से 2013 तक नौसेना में 33 सालों तक सेवा दी थी। नई ‘तारागिरी’ हाईटेक स्टेल्थ तकनीक, बेहतर मारक क्षमता, अत्याधुनिक ऑटोमेशन और मजबूत सर्वाइवेबिलिटी से लैस है।इस युद्धपोत को वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है। प्रोजेक्ट 17-ए के युद्धपोत में पिछली पी-17 (शिवालिक) क्लास की तुलना में अधिक आधुनिक हथियार और सेंसर सिस्टम लगाए गए हैं।2026 तक नौसेना को सौंपे जाएंगे 3 युद्धपोतपिछले 11 महीनों में नौसेना को यह प्रोजेक्ट 17-ए का चौथा जहाज मिला है। पहले दो जहाजों के अनुभव के कारण ‘तारागिरी’ का निर्माण समय घटाकर 81 महीने कर दिया गया, जबकि शुरुआती जहाज ‘नीलगिरि’ में 93 महीने लगे थे। प्रोजेक्ट के बाकी तीन जहाज 2026 के अगस्त तक चरणबद्ध तरीके से नौसेना को सौंपे जाएंगे।रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस परियोजना में 75 प्रतिशत स्वदेशी हिस्सेदारी है और इसमें 200 से अधिक एमएसएमई जुड़े हैं।भारत की मिलेगी तीसरी परमाणु सबमरीनकार्यक्रम खत्म होने के कुछ समय बाद राजनाथ सिंह ने एक सोशल मीडिय प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि- यह सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि शक्ति का प्रतीक है- अरिदमन!' मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रक्षा मंत्री भारत की तीसरी स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिदमन को नौसेना में शामिल करने के संकेत दिए हैं।आईएनएस अरिदमन भारत की तीसरी ऐसी पनडुब्बी है जो परमाणु ऊर्जा से चलती है और परमाणु मिसाइलों को दागने में सक्षम है। इससे पहले आईएनएस अरिहंत (2016) और आईएनएस अरिघात (अगस्त 2024) को पहले ही नौसेना में शामिल किया जा चुका है।-----------------ये खबर भी पढ़ें…जंग के चलते तेजस के इंजन की सप्लाई रुकी, अमेरिकी कंपनी को डिलीवरी देनी हैमिडिल-ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण भारत के बहुप्रतीक्षित लड़ाकू विमान तेजस के इंजन की सप्लाई रुक गई है। इन विमानों के इंजन सप्लाई करने वाली अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को कह दिया है कि अभी सप्लाई नहीं दे पाएंगे। पूरी खबर पढ़ें….


Source: Dainik Bhaskar April 03, 2026 12:53 UTC



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