If there is no approval then how many trauma centers are running that too in two to three rooms - News Summed Up

If there is no approval then how many trauma centers are running that too in two to three rooms


या फिर ट्रामा के नाम से ही हास्पिटल को पंजीकृत कराना पड़ता है। दोनों ही स्थिति में सीएमअो कार्यालय की एक्सपर्ट कमेटी संबंधित ट्रामा सेंटर पर पहुंचकर मानक के अनुसार विशेषज्ञ व संसाधनों की जांच करती है। कमेटी की संस्तुति पर ही सीएमओ अनुमति प्रदान करते हैं। हैरानी की बात ये है? कि शहर से लेकर देहात तक बिना एप्रुवल के ही ट्रामा सेंटर खुल गए हैं। किस ट्रामा सेंटर में क्या सुविधा है? सीएमओ कार्यालय में भी रिपोर्ट उपलब्ध नहीं। इससे साफ है? कि ज्यादातर ट्रामा सेंटर मानकों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे हैं, जिनका मकसद केवल मरीजों को लूटना ही है।ये हैं ट्रामा सेंटर के मानकएक आदर्श ट्रामा सेंटर में सिविल सर्जन, एनेस्थेटिक्स, आर्थोपेडिक सर्जन, न्यूरो सर्जन के अलावा दूसरे स्पेशलिस्ट, ओटी टेक्नीशियन व वेंटीलेटर टेक्नीशियन के साथ अन्य ट्रेंड सहयोगी स्टाफ होना जरूरी है। एक्स-रे, थ्रीडी अल्ट्रासाउंड मशीन, सीटी स्कैन, ओटी सीलिंग लाइट, पैरामानीटर, एनेस्थीसिया मशीन, वेंटीलेटर, ट्रांसपोर्ट वेंटीलेटर, एबीजी मशीन, डेफिब्रिलेटर मानीटर, पावर ड्रिल, स्पलिंट, ट्रैक्शन आदि उपकरण होने चाहिएं। मरीजों को हायर सेंटर रेफर करने की जरूरत पड़े तो एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस होनी चाहिए। लेकिन, कथित ट्रामा सेंटरों में आधी भी सुविधाएं नहीं। विशेषज्ञों की बात तो भूल ही जाएं। यही वजह हैं? कि तमाम ट्रामा सेंटर बिना एप्रुवल लिए ही चल रहे हैं। इस सवाल का संतोषजनक जवाब अधिकारी भी नहीं दे रहे कि बिना एप्रुवल के ट्रामा सेंटर खुल कैसे गए और संचालित किसकी अनुमति से हो रहे हैं?


Source: Dainik Jagran July 25, 2021 00:22 UTC



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