Jabalpur News: आईटी पार्क में भूमि आवंटन की ही मुख्य शर्त का हो रहा खुला उल्लंघन - News Summed Up

Jabalpur News: आईटी पार्क में भूमि आवंटन की ही मुख्य शर्त का हो रहा खुला उल्लंघन


डिजिटल डेस्क,जबलपुर। आईटी पार्क, जो कभी शहर के औद्योगिक और आर्थिक विकास का स्वप्न बनकर उभरा था, आज प्रशासनिक उपेक्षा और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना की विफलता का सबसे बड़ा कारण भूमि आवंटन अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन है।मिट्टीमोल दी गई जमीन के अनुबंध की प्राथमिक शर्त के अनुसार, प्रत्येक 5000 वर्ग फीट आवंटित भूमि पर कम से कम 7 रोजगार पदों का सृजन अनिवार्य था। यदि इस गणित को 63 एकड़ के विशाल भू-खंड पर लागू किया जाए, तो हजारों स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलना चाहिए था। दुर्भाग्यवश, धरातल पर न तो वे पद सृजित हुए और न ही युवाओं को नियुक्तियां मिलीं।परिसर में ही बना लिया आवासजानकारों का कहना है कि आईटी पार्क में नियमों का उल्लंघन करते हुए कई निवेशकों ने बिना अनुमति के बड़े-बड़े गेस्ट हाउस और आवासीय संरचनाओं का निर्माण कर लिया है। औद्योगिक उपयोग के लिए आवंटित भूमि का यह व्यावसायिक और निजी उपयोग अवैध है। प्रशासन अब इन अवैध निर्माणों की जांच कर सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।नियमों को ताक पर रखकर दी ढीलजानकारों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने योजना के नियमों को ताक पर रखकर भूमि आवंटन प्रक्रिया में ढील दी। यदि इस पूरे आवंटन और निवेश प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आएंगी। बताया जा रहा है कि कई करोबारी पहले रिछाई में अपना सेटअप लगाए थे, सब्सिडी लेने के बाद सेटअप बेचकर यहां आ गए और अब यहां सब्सिडी का लाभ उठा रहे हैं।बता दें कि किसी भी यूनिट में 8-10 से ज्यादा मजदूर नहीं रखे जाते, ताकि श्रम कानूनों का पालन न करना पड़े। श्रम कानूनों का उल्लंघन भी यहां चर्चा का विषय है। भूमि का आवंटन मिला इलेक्ट्रिकल पार्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग के लिए और उपयोग हो रहा सिर्फ असेम्बलिंग के लिए यानी अनुबंध की सरासर अनदेखी हो रही है।कैग की रिपोर्ट से मचा हड़कम्पजबलपुर, भोपाल-इंदौर के आईटी पार्कों की जमीन पर कब्जे और दुरुपयोग का खुलासा कैग की रिपोर्ट से हुआ, जिसके बाद हड़कम्प मचा है। विधानसभा में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने मप्र के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में प्रदेश के आईटी पार्कों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का खुलासा हुआ।ऑडिट में सामने आया कि कई आईटी फर्मों ने एमपी स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) से सब्सिडी ली, लेकिन शर्तों का पालन नहीं किया। कुछ फर्मों की जमीन पर नर्सिंग कॉलेज चल रहा था। अब हालात ये हैं कि कैग की रिपोर्ट को लेकर कोई अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं है और वे बचाव की मुद्रा में हैं।


Source: Dainik Bhaskar April 09, 2026 11:23 UTC



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