रॉबर्ट वाड्रा से मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ कर रहा है। वाड्रा के चलते मनी लॉन्ड्रिंग एक बार फिर चर्चा में है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि ये होता क्या है, कैसे कोई मनी लॉन्ड्रिंग करता है और ऐसे मामलों में क्या सजा होती है। हम आपको यहां ऐसे ही कुछ साधारण से सवालों का जवाब दे रहे हैं--मनी लॉन्ड्रिंग क्या है? अमेरिका के माफिया ग्रुप्स के चलते यह शब्द पहली बार सामने आया था। काले धन को वैध बनाना ही मनी लॉन्ड्रिंग कहलाता है। इसमें आपराधिक तरीके से जुटाए पैसों को वैध बनाकर दिखाया जाता है। भ्रष्टाचार, बैंक खातों और वित्तीय दस्तावेजों में अनियमितता, अवैध सौदेबाजी (संपत्ति या किसी अन्य स्रोत) से मिला धन शामिल किया जाता है। 1990 में हवाला कारोबार के रूप में यह सबसे पहले भारत में सामने आया था, जिसमें कुछ बड़े नेताओं के नाम उजागर हुए थे।-भारत में मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के लिए क्या कानून है? भारत में मनी-लॉन्ड्रिंग निरोध अधिनियम, 2002 (Prevention of Money Laundering Act, 2002)1 जुलाई 2005 को प्रभाव में आया था। इसमें 3 बार संशोधन (2005, 2009 और 2012) किया जा चुका है। इसके बाद से ही अवैध लेनदेन को इस कानून के दायरे में लाया गया। मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के लिए ही दस्तावेजों में वित्तीय लेनदेन की पूरी जानकारी (जो सही हो) देना अनिवार्य किया गया है। इसी के तहत केवाईसी डिटेल भरनी होती है।-मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े चार बड़े केसेज क्या हैं? - PNB घोटाले में आरोपी कारोबारी नीरव मोदी पर मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस भी है।- , मुंबई का मीट कारोबारी, , दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन के मामले- शेयर बाजार घोटाले में हर्षद मेहता पर भी मनी लॉन्ड्रिंग का केस बना था।- IRCTC घोटाला: मनी लॉन्ड्रिंग केस में , और तेजस्वी यादव आरोपी हैं।-मनी लॉन्ड्रिंग करने पर क्या सजा मिलती है? ये केस पर निर्भर करता है। मनी लॉन्ड्रिंग में अवैध वित्तीय लेनदेन को शामिल किया गया है, लेकिन अगर कोई विदेश में अवैध संपत्ति जुटाने या विदेशी मुद्रा में लेनदेन का मामला होगा, तो इसे फेमा का उल्लंधन भी माना जाएगा। मान लीजिए कोई व्यक्ति भारत में रहकर अपनी संपत्ति की जानकारी में विदेशी संपत्ति को छुपाता है, या भारतीय या विदेशी मुद्रा का उपयोग बिना बताए लेनदेन या संपत्ति बनाने के लिए करता है, तो उस पर मनी लॉन्ड्रिंग के साथ फेमा उल्लंधन का मामला भी बनेगा। इसी तरह जब किसी बड़े मकान, दुकान या मॉल को खरीदकर कागजों पर उसकी कीमत कम दिखाई जाती है, तो यह मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में आता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि कम टैक्स देना पड़े। इस तरह की टैक्स चोरी से काला धन जुटाया जाता है।
Source: Dainik Bhaskar February 07, 2019 09:06 UTC