Mumbai News देश के नामी शिक्षण संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे (आईआईटी पवई) के छात्रावास में 19 फरवरी 2026 की रात उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब मामूली पैसों के विवाद के दौरान सुरक्षा जांच में एक छात्र के बैग से 7.65 एमएम के पांच जिंदा कारतूस बरामद किए गए। इस सनसनीखेज घटना ने न सिर्फ कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि हथियारों की अवैध सप्लाई के संभावित नेटवर्क की ओर भी इशारा किया है। इस मामले में आईआईटी पवई के सुरक्षाकर्मी की शिकायत पर पुलिस ने एक आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस की प्राथमिक जांच में जिंदा कारतूस के बिहार से ले आने की बात सामने आई है। पुलिस इस बिहार कनेक्शन की जांच में जुटी है।पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, आईआईटी पवई में सुरक्षा उप निरीक्षक के पद पर तैनात अमोद रामदास करंजे (49) 18 फरवरी की रात नाइट ड्यूटी पर थे। 19 फरवरी तड़के करीब 1.30 बजे क्विक रिस्पॉन्स टीम ने सूचना दी कि हॉस्टल नंबर-1 के ग्राउंड फ्लोर पर दो छात्रों के बीच विवाद चल रहा है। सुरक्षा टीम तत्काल मौके पर पहुंची, जहां पूछताछ में सामने आया कि रूम नंबर 93 में रहने वाले बी-टेक प्रथम वर्ष के छात्र सूरज दुबे और रूम नंबर 89 के छात्र अमन के बीच पैसों के लेन-देन को लेकर कहासुनी हुई थी।सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित कर दोनों को शांत कराया। इसी दौरान सूरज दुबे और उसके मित्र अपूर्व मिश्रा से शराब की गंध आने पर सुरक्षा टीम को शक हुआ। चूंकि हॉस्टल परिसर में शराब पर सख्त प्रतिबंध है, इसलिए नियमों के तहत दोनों छात्रों के कमरों की तलाशी लेने का निर्णय लिया गया। तलाशी के दौरान सूरज दुबे के कमरे में रखे काले रंग के बैग की जांच की गई। बैग के अगले हिस्से से केएफ 7.65 अंकित पीले धातु के पांच जिंदा कारतूस बरामद हुए। बरामद कारतूसों की अनुमानित कीमत करीब 3500 रुपये बताई गई है।पूछताछ में सूरज दुबे ने दावा किया कि बैग उसका नहीं, बल्कि उसके दोस्त अपूर्व मिश्रा का है। इसके बाद अपूर्व मिश्रा से सख्ती से पूछताछ की गई, जिसमें उसने चौंकाने वाला खुलासा किया। अपूर्व ने बताया कि ये कारतूस उसके मित्र सर्वोत्तम आनंद सतीशचंद्र चौधरी (23) के हैं, जो समस्तीपुर, बिहार का निवासी है। सर्वोत्तम 12 फरवरी को आईआईटी पवई आया था और उसी ने ये जिंदा कारतूस बैग में रखे थे। घटना की सूचना तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई। 19 फरवरी को जब सर्वोत्तम चौधरी दोबारा आईआईटी पवई पहुंचा, तो उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने ये 7.65 एमएम के कारतूस बिहार के मुंगेर से खरीदे थे। इसके बाद रात करीब 10 बजे सुरक्षा उप निरीक्षक अमोद करंजे को पांचों जिंदा कारतूसों के साथ पुलिस स्टेशन भेजा गया, जहां सर्वोत्तम आनंद चौधरी के खिलाफ अवैध रूप से गोला-बारूद रखने और परिवहन से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया। देश के शीर्ष तकनीकी संस्थान के छात्रावास से जिंदा कारतूस मिलना बेहद गंभीर मामला माना जा रहा है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपी कारतूस लेकर कैंपस क्यों आया था, क्या इसके पीछे किसी आपराधिक साजिश या हथियार सप्लाई नेटवर्क का संबंध है, और क्या इसमें अन्य लोग भी शामिल हैं। फिलहाल, इस घटना के बाद आईआईटी पवई परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है, जबकि पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है।
Source: Dainik Bhaskar February 22, 2026 01:39 UTC