Nagpur News: जमीन नहीं, तो कैसे खर्च होंगे 1927 करोड़ , बजट सत्र में उठेगा मुद्दा - News Summed Up

Nagpur News: जमीन नहीं, तो कैसे खर्च होंगे 1927 करोड़ , बजट सत्र में उठेगा मुद्दा


Nagpur News महाराष्ट्र विधानमंडल का बजट सत्र चल रहा है। एक बार फिर शहर की जीवनरेखा कही जाने वाली नाग नदी का मुद्दा गरमाने के आसार हैं। 1927 करोड़ की परियोजना की घोषणा तो कर दी गई, लेकिन जमीन हस्तांतरण जैसे बुनियादी काम पूरे नहीं कर पाने से मनपा की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मनपा प्रशासन दावा है कि, सेंट्रल जोन सीवरेज नेटवर्क का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है। 200 किमी लंबा नेटवर्क बिछाने की योजना तैयार है। हकीकत यह है कि, तीन प्रस्तावित स्थानों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के लिए अब तक जमीन ही उपलब्ध नहीं हो पाई है। ऐसे में करोड़ों की योजना कागजों से आगे नहीं बढ़ पा रही है।तो परियोजना की घोषणा क्यों? : परियोजना के तहत 102 एमएलडी क्षमता के एसटीपी बनाए जाने हैं। करीब 400 करोड़ रुपए एसटीपी निर्माण पर और 600 करोड़ रुपए सीवरेज नेटवर्क पर खर्च किए जाने हैं। 35 एमएलडी क्षमता का एसटीपी पंजाबराव कृषि विद्यापीठ (पीकेवी) परिसर में, 12 एमएलडी का प्लांट वीएनआईटी क्षेत्र में और 45 एमएलडी का प्लांट नारी इलाके में प्रस्तावित है। संबंधित विभागों से जमीन का हस्तांतरण सुनिश्चित करने में मनपा अब तक असफल रही है। सवाल उठता है कि, जब तक भूमि उपलब्ध नहीं थी, तब इतनी बड़ी परियोजना की घोषणा क्यों की गई? बजट सत्र में सरकार के समक्ष यह मुद्दा उठने की संभावना है।दावा और जमीन पर सच्चाई अलग : मनपा का कहना है कि, लक्ष्मी नगर, हनुमान नगर, धंतोली, नेहरू नगर, सतरंजीपुरा और लकड़गंज क्षेत्रों में भूमिगत गटर लाइन डाली जाएगी। सर्वेक्षण पूरा होने की बात कही जा रही है। निर्माण कार्य की शुरुआत जमीन विवाद के कारण अटकी हुई है।इलेक्ट्रिक शवदाह गृह भी प्रतीक्षा में : नदी प्रदूषण रोकने के नाम पर मोक्षधाम में इलेक्ट्रिक शवदाह यूनिट स्थापित करने की घोषणा की गई थी। नदी में राख समेत अन्य प्रदूषण रोकने के लिए शहर का पहला इलेक्ट्रिक शवदहन यूनिट बनाया जाएगा। 1.21 करोड़ रुपए की इस योजना की निविदा प्रक्रिया पूरी होने का दावा किया गया है, लेकिन यह प्रक्रिया भी अब तक आगे नहीं बढ़ पाई है।सत्र में जवाबदेही तय होगी? बजट सत्र सरकार के लिए जवाबदेही का मंच होता है। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्र की परियोजनाओं पर सवाल उठाते हैं। ऐसे में नाग नदी जैसी बहुचर्चित परियोजना पर यदि ठोस निर्णय नहीं हुआ, तो यह संकेत होगा कि, प्रशासनिक इच्छाशक्ति कमजोर है। भूमि हस्तांतरण के लिए संबंधित विभागों की संयुक्त बैठक और अंतिम मंजूरी अब सरकार के स्तर पर ही संभव है। यदि, बजट सत्र में इस पर स्पष्ट निर्देश और समयसीमा तय नहीं की गई, तो परियोजना की लागत और समय दोनों बढ़ने का खतरा रहेगा।


Source: Dainik Bhaskar February 25, 2026 14:10 UTC



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