रविवार को नैनीताल के पर्वतीय क्षेत्रों में भीषण ओलावृष्टि हुई। ओखलकांडा, धारी और रामगढ़ ब्लॉक के दर्जनों गांवों में हुई इस ओलावृष्टि से किसानों और बागवानों को भारी नुकसान हुआ है। कुछ ही मिनटों में उनकी साल भर की मेहनत बर्बाद हो गई।. कुमाऊं के 'फलों का कटोरा' कहे जाने वाले रामगढ़ और धारी क्षेत्र में इस समय आड़ू, पुलम, खुमानी और सेब के पेड़ों पर फूल खिल रहे थे। कई पेड़ों पर छोटे-छोटे फल आने शुरू ही हुए थे। अचानक हुई ओलावृष्टि ने इन उम्मीदों को तोड़ दिया। सफेद ओलों की चादर ने पेड़ों को इस कदर चोट पहुंचाई कि फूल और कच्चे फल टूटकर जमीन पर बिखर गए। फलों के साथ-साथ सब्जियों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।स्थानीय बागवानों का कहना है कि यह केवल फसल का नुकसान नहीं है, बल्कि यह उनके पूरे साल के सपनों, बच्चों की शिक्षा और परिवार के भरण-पोषण पर सीधा असर डालेगा। ओखलकांडा और धारी के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में भी नकदी फसलों और सब्जियों को ओलों से भारी क्षति हुई है।किसान चंदन नयाल ने कृषि विभाग और उद्यान विभाग से किसानों को हुए नुकसान का तत्काल निरीक्षण करने का आग्रह किया है। उन्होंने सरकार से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की भी मांग की है।
Source: Dainik Bhaskar April 05, 2026 18:07 UTC