भास्कर न्यूज, जुन्नर। जुन्नर तहसील के आर्वी गांव में महिला ने अपने बेटे के शिक्षा के अधिकार के लिए अनोखा और खतरनाक रास्ता अपनाते हुए बीएसएनएल के 140 फुट ऊंचे मोबाइल टॉवर पर चढ़कर आंदोलन किया। सविता बाबू कांबले नामक यह महिला सोमवार तड़के तीन बजे टॉवर पर चढ़ी थी, लेकिन ग्रामीणों को इसका पता मंगलवार दोपहर को चला। महिला का स्पष्ट कहना था कि जब तक मुख्यमंत्री खुद यहां नहीं आते या उनकी समस्या का समाधान नहीं होता, वह नीचे नहीं उतरेंगी। प्रशासन ने उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क होने का आश्वासन दिया, लेकिन महिला अपनी बात पर अड़ी रही और भावुक होकर कहा कि वह अपने बच्चों के भविष्य के लिए मजबूर होकर यह कदम उठा रही है।इस पूरे विवाद की जड़ में अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के आरक्षण और छात्रवृत्ति का मामला है। मूल रूप से कर्नाटक का रहने वाला यह परिवार वर्तमान में जुन्नर में रह रहा है। महिला का बेटा तहसील के एक कॉलेज में डिग्री की पढ़ाई कर रहा था। प्रवेश के समय आश्वासन दिया गया था कि एससी वर्ग में होने के कारण उसे छात्रवृत्ति मिलेगी और फीस माफ होगी। हालांकि, तकनीकी समस्या तब आई जब पता चला कि कर्नाटक की उनकी विशेष जाति महाराष्ट्र की अनुसूचित जाति की सूची में शामिल नहीं है। इसके चलते छात्रवृत्ति रुक गई और कॉलेज ने 60 हजार रुपए फीस जमा न करने तक छात्र को लिविंग सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया। बेटे की शिक्षा रुकने के कारण मां ने यह कदम उठाया।घंटों बातचीत के बाद महिला को सुरक्षित नीचे उताराजैसे ही प्रशासन को मामले की गंभीरता का पता चला, नारायणगांव पुलिस, राजस्व विभाग की टीम और जुन्नर रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। नारायणगांव पुलिस के सहायक निरीक्षक पी.एम. सपांगे और अन्य अधिकारियों ने नीचे से काफी देर तक महिला को समझाने की कोशिश की, लेकिन महिला का आक्रोश कम नहीं हुआ। आखिर स्थिति को बिगड़ते देख जुन्नर फायर ब्रिगेड के चार जवान टॉवर पर चढ़े। कड़ी मशक्कत और घंटों की बातचीत के बाद शाम करीब पौने पांच बजे महिला को सुरक्षित नीचे उतारा गया। तहसीलदार डॉ. सुनील शेल्के ने बताया कि नीचे उतारने के बाद महिला को तुरंत उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
Source: Dainik Bhaskar January 08, 2026 08:19 UTC