भास्कर न्यूज, पुणे। महाराष्ट्र की समृद्ध कृषि परंपरा को पर्यटन से जोड़ते हुए ग्रामीण विकास को गति देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने कृषि-पर्यटन नीति को लागू करने की अनुमति दी है। इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महाराष्ट्र पर्यटन विकास महामंडल (एमटीडीसी) द्वारा सब्सिडी और विभिन्न रियायतें प्रदान की जा रही हैं। इसका उद्देश्य पर्यटकों को प्रकृति से जोड़ना, किसानों की आय बढ़ाना और ग्रामीण युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित करना है।कृषि-पर्यटन नीति के तहत किसानों और कृषि-पर्यटन केंद्र स्थापित करने वाले युवाओं को पंजीकरण प्रमाणपत्र के आधार पर बैंक ऋण सुविधा, बिजली व करों में छूट, एमटीडीसी की वेबसाइट पर प्रचार, तथा स्थानीय कृषि उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा केंद्र संचालन के लिए नियमों में ढील देते हुए 4 से 8 कमरों तक बिना अनुमति उपयोग की सुविधा भी दी गई है।इस योजना के माध्यम से पर्यटक खेतों में हल चलाने, बोवाई, कटाई जैसे कृषि कार्यों का प्रत्यक्ष अनुभव ले सकेंगे। साथ ही बैलगाड़ी और घुड़सवारी, ग्रामीण खेल, लोक कला कार्यक्रम, पारंपरिक महाराष्ट्रीय भोजन, सेंद्रिय खेती, जल संरक्षण, सौर एवं पवन ऊर्जा, हस्तकला, आदिवासी कला और खाद्य संस्कृति का भी आनंद उठा सकेंगे।कृषि-पर्यटन से जुड़े क्षेत्रों जैसे पर्यटन गाइडिंग, होटल व होमस्टे प्रबंधन, साहसी पर्यटन गतिविधियां, फल प्रसंस्करण, लघु उद्योग, हस्तकला और लोक संस्कृति संरक्षण परियोजनाओं के माध्यम से युवाओं और महिलाओं को अपने गांव में ही रोजगार मिलेगा। इससे शहरों की ओर बढ़ते पलायन पर अंकुश लगेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी।राज्य सरकार और एमटीडीसी की यह पहल महाराष्ट्र में कृषि-पर्यटन को नई पहचान दिलाने के साथ-साथ ग्रामीण जीवन को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
Source: Dainik Bhaskar January 08, 2026 11:59 UTC